सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ बना अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट चैंपियन
मेजबान सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ ने अंडर-15 और अंडर-17 श्रेणियों में जीत दर्ज कर ओवरऑल ट्रॉफी जीती, जिसमें पांच राज्यों के स्कूलों ने हिस्सा लिया।

चित्तौड़गढ़ में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय सैनिक स्कूल हॉकी टूर्नामेंट के समापन समारोह में ट्रॉफी और प्रमाणपत्रों के साथ विजयी टीम के कैडेट और अतिथि।
खेल भावना, अनुशासन और कड़े संघर्ष के बीच सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के प्रांगण में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय सैनिक स्कूल हॉकी टूर्नामेंट शुक्रवार को धूमधाम और विजयघोष के साथ संपन्न हुआ। इस गौरवशाली प्रतियोगिता में मेजबान सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ ने अपने शौर्य और कौशल का लोहा मनवाते हुए अंडर-15 और अंडर-17 दोनों वर्गों में ओवरऑल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर इतिहास रच दिया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया ने स्कूल के हॉकी ग्राउंड पर आधिकारिक रूप से मीट के समापन की घोषणा की। इससे पूर्व, स्कूल की उप प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल पारुल श्रीवास्तव, प्रशासनिक अधिकारी मेजर सी श्रीकुमार, सीनियर मास्टर ओंकार सिंह और प्रतियोगिता संयोजक विकास चौबे ने मुख्य अतिथि का गर्मजोशी से स्वागत किया। जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान के अनुसार, इस प्रतिष्ठित ग्रुप स्तरीय प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के पांच सैनिक स्कूलों के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा देखी गई।
मैदान पर हुए रोमांचक मुकाबलों में अंडर-15 वर्ग में सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि सैनिक स्कूल मैनपुरी उपविजेता के रूप में उभरा। वहीं, अंडर-17 वर्ग में भी चित्तौड़गढ़ ने अपनी बादशाहत कायम रखी और सैनिक स्कूल अमेठी को उपविजेता के स्थान पर संतोष करना पड़ा। व्यक्तिगत उत्कृष्टता के लिए अंडर-15 वर्ग में सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के कैडेट हर्षित यादव को 'सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी' और मैनपुरी के कैडेट अमोग सिंह को 'सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर' चुना गया। अंडर-17 वर्ग में चित्तौड़गढ़ के कैडेट हितेश महला ने 'सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी' और कैडेट मोहित ने 'सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर' का खिताब जीतकर अपनी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।
मुख्य अतिथि कर्नल जसरोटिया ने विजयी टीमों और खिलाड़ियों को पदक एवं ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया। अपने संबोधन में उन्होंने प्रतिभागियों के समर्पण और खेल भावना की सराहना करते हुए कहा कि खेल केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक विकास और सामाजिक मेल-जोल का सशक्त माध्यम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैनिक स्कूल भविष्य के राष्ट्र रक्षकों की पाठशाला है, जहां खेल के मैदान में बहाया गया पसीना अनुशासन, संयम, टीम भावना और नेतृत्व जैसे जीवन रक्षक मूल्यों का निर्माण करता है। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि असली जीत हार को सम्मानपूर्वक और जीत को विनम्रता के साथ स्वीकार करने में निहित है, और जीवन के संघर्ष में ईमानदारी, मेहनत तथा एकता ही सफलता की कुंजी है।

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