प्रियंका बोहरा की 54 उपवास की कठिन तपस्या पर हुआ भावपूर्ण अभिनन्दन
निम्बाहेड़ा में प्रियंका बोहरा की 54 उपवास की कठिन तपस्या पर धर्मसभा में अभिनन्दन हुआ, साध्वी अरुणप्रभा जी ने तप के महत्व पर प्रकाश डाला।

तस्वीर में जैन दिवाकर भवन में आयोजित धर्मसभा के दौरान 54 उपवास की तपस्या करने वाली प्रियंका बोहरा आसन पर बैठी हैं और आसपास उपस्थित गणमान्य लोग व श्रावक-श्राविकाएं उनका अभिनंदन कर रहे हैं।
जैन दिवाकर भवन में साध्वी श्री अरुणप्रभा जी म. सा. के पावन सानिध्य में आयोजित धर्मसभा में प्रियंका बोहरा की 54 उपवास की कठिन तपस्या के उपलक्ष्य में भावपूर्ण अभिनन्दन किया गया। इस दौरान जैन समाज और उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्या की अनुमोदना करते हुए उनके आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।
धर्मसभा में साध्वी श्री अरुणप्रभा जी म. सा. ने तपस्या के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तप आत्मशुद्धि, संयम और साधना का श्रेष्ठ माध्यम है। 54 उपवास जैसी कठिन तपस्या तपस्वी की दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मबल एवं धर्म के प्रति गहरी आस्था को दर्शाती है।
इस अवसर पर संघ की ओर से प्रियंका बोहरा का शाल, माला, स्मृति चिन्ह एवं अभिनन्दन पत्र देकर स्वागत किया गया। अभिनन्दन पत्र का वाचन संघ के मन्त्री आनन्द सालेचा ने किया। जैन समाज एवं उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने भी तपस्वी प्रियंका बोहरा के तप की अनुमोदना की।
धर्मसभा में कमलेश ढेलावत, राजेश जैन कान्हा, सपना जैन, विजय लोढ़ा, ज्ञानचंद ढेलावत, शेरसिंह पारख, अर्पित सिंघवी, बाबूलाल सिंघवी सहित अनेक श्रद्धालुओं ने ‘तपस्वी प्रियंका बोहरा की जय’ के जयघोष के साथ तपस्या की अनुमोदना की तथा उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।
तपस्वी प्रियंका बोहरा ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु कृपा से ही तप सम्भव हो पाया है। परिवारजन सहयोगी बने और देव, गुरु, धर्म की कृपा खूब रही।
साध्वी श्री अरुणप्रभा जी म. सा. के सानिध्य में हुई धर्मसभा भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण से ओत-प्रोत रही। धर्मसभा में सुरत, अहमदाबाद, मंदसौर, चित्तौड़, नीमच, भीलवाड़ा, बैंगलोर सहित आसपास के श्रद्धालु उपस्थित रहे।
दोपहर में विधायक श्रीचंद्र कृपलानी, पूर्व विधायक अशोक नवलखा, नितिन चतुर्वेदी, कपिल चौधरी, वीरेश चपलोत, कमलेश बनवार, गजेन्द्र नवलखा, देवकरण समदानी सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने तपस्वी प्रियंका बोहरा का शाल-माला पहनाकर स्वागत एवं अभिनन्दन किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। 54 उपवास की कठिन तपस्या के अवसर पर हुआ यह अभिनन्दन धर्मसभा में तप, संयम और साधना के प्रति श्रद्धा का प्रमुख अवसर रहा।

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