कांकरवा में गणतंत्र दिवस की धूम: नन्हे सितारों ने बिखेरी देशभक्ति की छटा, समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट हुआ ग्रामीण समाज
चित्तौड़गढ़ के कांकरवा में गणतंत्र दिवस पर राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। खंगार सिंह चौहान, शिवपाल सिंह पंवार व अन्य अतिथियों की मौजूदगी में बच्चों ने पीटी, परेड और देशभक्ति नृत्यों से समां बांधा। विद्यालय के विकास और प्रतिभाओं के सम्मान के संकल्प के साथ मनाया गया यह उत्सव राष्ट्रप्रेम की अनूठी मिसाल बना।

कांकरवा (चित्तौड़गढ़)। चित्तौड़गढ़ जिले के कांकरवा क्षेत्र में 77वां गणतंत्र दिवस केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक विरासत के संगम का गवाह बना। समूचे ग्रामीण आंचल में तिरंगे की आन-बान और शान के बीच सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों में भारी उत्साह देखा गया। इस उत्सव का मुख्य केंद्र राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय (इंद्रा कॉलोनी) रहा, जहां प्रधानाचार्य खंगार सिंह चौहान द्वारा ध्वजारोहण के साथ ही फिजां 'जन गण मन' के उद्घोष से गूंज उठी। समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गणेश वंदना से शुरू हुआ यह सफर 'पधारो म्हारे देश' की सुरीली धुनों से होता हुआ लोक संस्कृति के रंगों तक जा पहुंचा।
कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए मंच पर अध्यक्षता प्रधानाचार्य खंगार सिंह चौहान ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में शिवपाल सिंह पंवार मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथियों में नारायण सिंह राठौड़, प्रेम सिंह राठौड़, गोमाराम भील, नारायण लाल तेली, रोशन लाल जाट और शंकरलाल भील की उपस्थिति ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत पीटी, कदमताल करती परेड और अनुशासित व्यायाम के प्रदर्शन ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। देशभक्ति के गीतों पर थिरकते नन्हे कदमों और ओजस्वी भाषणों ने हर किसी के भीतर राष्ट्रवाद की ज्वाला प्रज्वलित कर दी। विशेष आकर्षण के रूप में पायल, पूनम और उनकी टीम ने 'मारा पचरंगा लहर लहर लहराए मारो लहरिया' पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन 'फागण राज' और 'रंग मत डारे रे' जैसे नृत्यों के साथ हुआ, जिसने गणतंत्र के उत्सव को आगामी होली के उल्लास से सराबोर कर दिया।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को अतिथियों द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। वरिष्ठ अध्यापक विशाल टांक के कुशल मंच संचालन ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए, वहीं अध्यापिका गोरा यादव ने आगंतुक मेहमानों और ग्रामवासियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उत्सव के उल्लास के बीच प्रधानाचार्य खंगार सिंह चौहान ने विद्यालय की बुनियादी समस्याओं को भी सांझा किया। उन्होंने भवन की टपकती छतों और शिक्षकों के रिक्त पदों जैसी गंभीर चुनौतियों पर ग्रामवासियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। इस पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य अतिथि शिवपाल सिंह पंवार ने कक्षा 1 से 12 तक प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत करने की घोषणा की। स्वयं प्रधानाचार्य चौहान ने भी विद्यालय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए 15,000 रुपये की लागत से टेबल-कुर्सियां भेंट करने का संकल्प लिया।
क्षेत्र के अन्य संस्थानों में भी तिरंगे का गौरव देखते ही बना। राजकीय उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय (किर खेड़ा) में जैसा राम जांगिड़ ने ध्वजारोहण कर राष्ट्र को नमन किया, वहीं महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (कांकरवा) में प्रधानाध्यापिका कुलसुम मंसूरी ने तिरंगा फहराया। गणतंत्र का यह पर्व न केवल मनोरंजन का साधन बना, बल्कि इसने शिक्षा की गुणवत्ता और सामाजिक सहयोग के नए द्वार खोलने का संदेश भी दिया।

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