बेगू/रावतभाटा। चित्तौड़गढ़ जिले के जावदा–निमड़ी क्षेत्र स्थित ग्राम कंवरपुरा में पिछले एक महीने से पसरा दहशत का साया आखिरकार रविवार सुबह छंट गया। अपनी फुर्ती और खूंखार फितरत से ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ाने वाला लेपर्ड वन विभाग द्वारा बिछाए गए जाल में फंस गया है। बीते एक माह से यह वन्यजीव न केवल ग्रामीणों के लिए असुरक्षा का कारण बना हुआ था, बल्कि तीन मवेशियों को अपना निवाला बनाकर इसने क्षेत्र में भारी आर्थिक नुकसान और भय का माहौल पैदा कर दिया था। पिंजरे में लेपर्ड की दहाड़ के शांत होते ही पूरे क्षेत्र ने राहत की गहरी सांस ली है।

घटनाक्रम के अनुसार, लेपर्ड की लगातार सक्रियता और ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने इसे पकड़ने के लिए विशेष रणनीति तैयार की थी। उप वन संरक्षक राहुल जी झाझरिया तथा सहायक वन संरक्षक शोभाराम गुर्जर के कुशल निर्देशन में क्षेत्रीय वन अधिकारी (जावदा) नारायण सिंह कच्छवा की निगरानी में एक विशेष टीम गठित की गई। विभाग ने क्षेत्र में लेपर्ड की मूवमेंट को ट्रैक करते हुए रणनीतिक रूप से पिंजरा लगाया था। आज तड़के जैसे ही भूखा लेपर्ड शिकार के लालच में पिंजरे के भीतर दाखिल हुआ, वह सुरक्षित रूप से कैद हो गया। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन से किसी भी संभावित मानवीय जनहानि या बड़ी अनहोनी को समय रहते टाल दिया गया।

इस चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में नाका प्रभारी रणदीप जाट, सोना राठौर, उमेश गाँच्छा, युधिष्ठिर वीरवाल, अल्ताफ़ ख़ान, कमलेश जाट, सुभाष भाटी और प्रहलाद सिंह राठौड़ ने सक्रिय भूमिका निभाई। साथ ही चौकीदार बागदीराम, पशुपालन विभाग के कर्मचारी मुकेश मीणा व गोपाल मीणा, पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रहलाद धाकड़ एवं दुर्गाशंकर मेघवाल सहित समस्त ग्रामवासियों का अभूतपूर्व सहयोग रहा। सभी के सम्मिलित प्रयासों से लेपर्ड को बिना किसी चोट के सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। वर्तमान में विभाग द्वारा नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई और लेपर्ड के स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रिया पूर्ण की जा रही है, जिसके बाद इसे उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।

वन विभाग ने इस सफल अभियान के बाद ग्रामीणों के धैर्य और सहयोग के लिए आभार प्रकट किया है। साथ ही, विभाग ने एक सार्वजनिक अपील जारी करते हुए कहा है कि भविष्य में भी यदि किसी वन्यजीव की गतिविधि रिहाइशी इलाकों में देखी जाती है, तो स्वयं जोखिम उठाने के बजाय तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दें। लेपर्ड के पकड़े जाने के बाद अब कंवरपुरा और आसपास के गांवों में स्थिति पूरी तरह सामान्य है और जनजीवन वापस अपनी पुरानी रफ़्तार पर लौट आया है।

Pratahkal Bureau

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