सीएचओ का हुंकार: 4800 पे-ग्रेड और नियमितीकरण की मांग को लेकर आर-पार के मूड में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी
राज्य भर के 9700 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अपनी मांगों को लेकर लामबंद हुए हैं और 23 जून को जयपुर में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

चित्तौड़गढ़ कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन करते राजस्थान एसोसिएशन ऑफ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) के सदस्य।
राजस्थान के चिकित्सा जगत में इन दिनों एक बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। चित्तौड़गढ़ में सोमवार को राजस्थान एसोसिएशन ऑफ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) के बैनर तले सैकड़ों सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर एक निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने इन अधिकारियों ने जिला कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को चिकित्सा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा और भविष्य की अनिश्चितता को उजागर किया है।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए संगठन के जिलाध्यक्ष विपुल शर्मा ने स्पष्ट किया कि पिछले चार वर्षों से निरंतर सेवाएं देने के बावजूद इन अधिकारियों के लिए न तो कोई नियमित पद सृजित किया गया है और न ही संविदा सीएचओ का कोई पृथक कैडर बनाया गया है। जिला संरक्षक डॉ. सी. पी. पटेल ने इस प्रशासनिक उदासीनता पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के 9700 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी लंबे समय से सेवा सुरक्षा और अपने भविष्य को लेकर भारी मानसिक तनाव और आक्रोश में हैं।
प्रदर्शन के दौरान रईस मंसुरी ने एक अहम मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि तीन वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद भी सरकार द्वारा घोषित 10 प्रतिशत लॉयल्टी बोनस का लाभ आज तक कर्मचारियों को नहीं मिल पाया है। यह आर्थिक अनदेखी कर्मचारियों के मनोबल को गिरा रही है। अपनी मांगों को प्राथमिकता देते हुए संगठन ने सात दिनों का अल्टीमेटम दिया है। यदि इस निर्धारित समय सीमा के भीतर सरकार सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है और संगठन के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता नहीं करती है, तो 23 जून को जयपुर के शहीद स्मारक पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
संगठन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस आंदोलन के दौरान प्रदेश भर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार और संबंधित विभाग की होगी। नियमित पद सृजन, पृथक कैडर का निर्माण, सेवा सुरक्षा और लंबित लॉयल्टी बोनस के भुगतान जैसी मांगों को लेकर अडिग इन सीएचओ का कहना है कि अब वे अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। चित्तौड़गढ़ में बड़ी संख्या में उपस्थित स्वास्थ्य अधिकारियों की यह भीड़ सरकार के लिए एक चेतावनी है, जो स्पष्ट करती है कि अब आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस समाधान की प्रतीक्षा है।

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