चित्तौड़गढ़ में रबी फसलों पर मंडराया 'मोयला' का संकट: कृषि विशेषज्ञों की टीम ने खेतों में उतरकर दिया बचाव का मंत्र
चित्तौड़गढ़ के सिंहपुर और नारेला क्षेत्र में सरसों की फसल पर मोयला कीट के प्रकोप ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त निदेशक दिनेश कुमार जागा और मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रतन लाल सोलंकी सहित विशेषज्ञों की टीम ने खेतों का निरीक्षण कर कीट नियंत्रण के लिए मैलाथियॉन और डाईमिथोएट के उपयोग की तकनीकी सलाह दी। जानिए कैसे करें अपनी फसल की सुरक्षा और वैज्ञानिकों ने क्या दिए निर्देश।

चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की धरा पर लहलहाती रबी की फसलों पर इस बार कीटों की टेढ़ी नजर पड़ गई है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। जिले के सिंहपुर, नारेला और इनके समीपवर्ती क्षेत्रों में फसलों की सेहत बिगड़ने की सूचना मिलते ही कृषि महकमा पूरी तरह से हरकत में आ गया है। फसलों की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने और अन्नदाता को इस संकट से उबारने के लिए कृषि विभाग के उच्चाधिकारियों और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का सघन दौरा किया। खेतों की मेड़ों पर पहुंचे इन विशेषज्ञों ने जब फसलों का सूक्ष्म निरीक्षण किया, तो सरसों की फसल में 'मोयला' कीट का गंभीर प्रकोप देखने को मिला, जो उत्पादन के लिए एक बड़ी चेतावनी साबित हो सकता है।
निरीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि सरसों के पौधों पर मोयला कीट तेजी से हमला कर रहे हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने मौके पर ही मौजूद किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया और इस शत्रु कीट के खात्मे के लिए अचूक उपाय बताए। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि मोयला के प्रभावी नियंत्रण हेतु किसान भाई मैलाथियॉन 5 प्रतिशत चूर्ण का 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें। यदि छिड़काव करना हो, तो मैलाथियॉन 50 ई.सी. की 1.25 लीटर मात्रा या फिर डाईमिथोएट 30 ई.सी. की 875 मिलीलीटर मात्रा को प्रति हेक्टेयर के अनुसार उचित पानी में घोलकर इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए।
खेतों के बीच चले इस 'क्लीनिक' में जिले के कृषि प्रशासन का शीर्ष नेतृत्व मौजूद रहा। इस महत्वपूर्ण निरीक्षण दल का नेतृत्व संयुक्त निदेशक कृषि दिनेश कुमार जागा ने किया, जिनके साथ मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रतन लाल सोलंकी, उप निदेशक ओ.पी. शर्मा, उप निदेशक उद्यान डॉ. शंकर लाल जाट और सहायक निदेशक कृषि रामजश खटीक सक्रिय रूप से मौजूद रहे। विभागीय अधिकारियों की इस मुस्तैदी और वैज्ञानिकों की त्वरित सलाह ने क्षेत्र के बड़ी संख्या में उपस्थित किसानों में एक नया विश्वास जगाया है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य न केवल कीट नियंत्रण था, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जिले का कृषि उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों की मेहनत का उचित मूल्य उन्हें मिल सके।

Pratahkal Newsroom
प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
