महिलाओं के एकांकी जीवन पर राष्ट्र संत पुलकसागर जी महाराज ने जताई चिंता
राष्ट्र संत पुलकसागर जी महाराज ने महिलाओं के एकांकी जीवन, सामाजिक असंतुलन और जनसंख्या संकट पर चिंता जताते हुए चिंतन की बात कही।

आकोला के सूर्य महल स्थित चातुर्मास प्रांगण में विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों को संबोधित कर आशीर्वाद देते राष्ट्र संत पुलकसागर जी महाराज।
आकोला। राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य श्री पुलकसागर जी महाराज ने महिलाओं के एकांकी जीवन को समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बताते हुए सामाजिक असंतुलन और जनसंख्या संकट की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षित महिलाओं का सक्षम होना समाज और राष्ट्र के लिए अच्छे प्रभावों के साथ बुरे प्रभाव भी ला रहा है।
सूर्य महल स्थित चातुर्मास प्रांगण में विश्व हिंदू परिषद राजस्थान क्षेत्र के पदाधिकारियों के साथ चार्तुमास दर्शन और संपर्क कार्यक्रम के तहत विशेष चर्चा के दौरान राष्ट्र संत पूज्यगुरुदेव मनोज्ञाचार्य श्री पुलकसागर जी महाराज ने कई प्रमुख सामाजिक समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वावलम्बी होने के कारण आज महिलाओं में एकांकी जीवन जीने की लालसा बढ़ी है। आज़ाद रहना उनका समाज और राष्ट्र के लिए संकट पैदा करने वाला विषय है। उन्होंने कहा कि एकांकी जीवन से नया जनसंख्या संकट गंभीर हो जाएगा।
इस दौरान विश्व हिंदू परिषद राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री सेवानिवृत्ति इंजीनियर सुरेश उपाध्याय, प्रांत के सह मंत्री युधिष्ठिर सिंह हाड़ा, प्रांत के सह मंत्री सेवानिवृत्ति पूर्व न्यायाधीश किशन गुर्जर, बद्रीलाल सोमानी, विभाग मंत्री विजय ओझा, बजरंग दल के प्रांत सह संयोजक संयोजक अखिलेश व्यास, भारत गैंगट, मुकेश प्रजापत, पवन ठाकुर, महेंद्र सिंघवी सहित कई पदाधिकारियों ने गुरुदेव से चर्चा की।
चातुर्मास प्रांगण में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का चातुर्मास आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीण जैन और अन्य पदाधिकारियों ने केसर तिलक लगाकर तथा अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत और अभिनंदन किया। गुरुदेव पुलक सागर जी महाराज ने सभी को आशीर्वाद देते हुए सामाजिक असंतुलन और पढ़े-लिखे परिवारों के परित्याग की समस्याओं पर चिंतन करने को कहा।
राष्ट्र संत पुलकसागर जी महाराज की इस चर्चा में महिलाओं के एकांकी जीवन, सामाजिक असंतुलन, पढ़े-लिखे परिवारों के परित्याग और बढ़ते जनसंख्या संकट जैसे विषय प्रमुखता से सामने आए, जिससे सामाजिक संरचना से जुड़े इन मुद्दों पर चिंतन की आवश्यकता रेखांकित हुई।

Pratahkal Bureau
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