अरावली संरक्षण को लेकर जनआंदोलन तेज, राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
चित्तौड़गढ़ में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर जनआंदोलन तेज हो गया है। श्री बालाजी सेवा संस्थान और संगम विकास समिति के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर पुनर्विचार और अरावली को पूर्ण कानूनी सुरक्षा देने की मांग की।

चित्तौड़गढ़। देश की प्राचीन और जीवनदायिनी अरावली पर्वतमाला को बचाने की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है। अरावली के अस्तित्व पर मंडरा रहे गंभीर खतरे के विरोध में शुक्रवार को चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर व्यापक जनजागरण देखने को मिला, जहां श्री बालाजी सेवा संस्थान के बैनर तले बड़ी संख्या में नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से देश के राष्ट्रपति से अपील की गई कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर हस्तक्षेप करते हुए पुनर्विचार का मार्ग प्रशस्त किया जाए, ताकि अरावली पर्वतमाला को पूर्ण और प्रभावी कानूनी संरक्षण मिल सके। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो जनहित से जुड़े इस मिशन में वे पीछे नहीं हटेंगे।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि केंद्र सरकार की सिफारिश के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश में अरावली की परिभाषा को 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों तक सीमित कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप लगभग 90 प्रतिशत अरावली क्षेत्र कानूनी संरक्षण से बाहर हो गया है, जिससे खनन और निर्माण गतिविधियों के लिए रास्ता खुल सकता है। इसे पर्यावरण के लिए गंभीर और दूरगामी दुष्परिणाम वाला निर्णय बताया गया।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि अरावली पर्वतमाला केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है। यह थार मरुस्थल के विस्तार को रोकने, धूल भरी आंधियों से बचाव करने और भूजल रिचार्ज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि इन पहाड़ियों का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाला समय देश के लिए भयावह सिद्ध हो सकता है। खनन माफियाओं को लाभ पहुंचाने वाला यह निर्णय जैव विविधता, जलस्तर और वायु गुणवत्ता पर गंभीर असर डालेगा।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि अरावली के दोहन से भूजल स्तर और नीचे जाएगा, जिससे जल संकट गहराएगा, वहीं धूल और प्रदूषण में वृद्धि से दिल्ली-एनसीआर सहित पश्चिमी भारत की हवा और अधिक जहरीली हो सकती है।
इस अवसर पर श्री बालाजी सेवा संस्थान से जुड़े नरेंद्र शर्मा, मनीष शर्मा, गणपत शर्मा, किरण खटीक, राधा वैष्णव, दीपिका गुर्जर, कल्पना नागर, पूजा धाकड़, अंजलि दाधीच, नीलम आमेटा, तारा भोई, नेहा प्रजापत, विमला माली सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। वहीं अरावली बचाओ मुहिम के तहत संगम विकास समिति के बालकिशन भोई, हर्षवर्धन सिंह, पूरन राणा, हरीश ईनाणी, ओमप्रकाश शर्मा, ओमप्रकाश लड्ढा, मनोज वैष्णव और गोपाल कृष्ण दाधीच के नेतृत्व में भी ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में वरिष्ठजन, युवा कार्यकर्ता तथा माताएं-बहनें मौजूद रहीं।
अरावली के संरक्षण को लेकर उठी यह आवाज न केवल पर्यावरण सुरक्षा की चेतावनी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की गंभीर पुकार भी है, जिसने प्रशासन और नीति निर्धारकों का ध्यान एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे की ओर खींचा है।
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