प्रतापगढ़: वतन की राह से घर की चौखट तक, वायुसेना के जांबाज यशपाल मीणा का ऐतिहासिक अभिनंदन
भारतीय वायुसेना में 20 वर्ष तक देश की सेवा करने के बाद सेवानिवृत्त हुए जांबाज यशपाल मीणा का प्रतापगढ़ के गांधी चौराहा पर ऐतिहासिक स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों और देशभक्ति के माहौल के बीच परिजनों, मित्रों और स्थानीय नेताओं ने पुष्पहारों से उनका अभिनंदन किया। बुज रामपुरिया निवासी यशपाल मीणा का यह सफर युवाओं के लिए प्रेरणा बना।

प्रतापगढ़। सरहदों की हिफाजत और आसमां की निगहबानी में अपने जीवन के दो दशक समर्पित करने वाले भारतीय वायुसेना के योद्धा जब अपनी मातृभूमि लौटे, तो समूचा प्रतापगढ़ पलक-पावड़े बिछाकर उनके स्वागत में उमड़ पड़ा। जवाहर नवोदय विद्यालय अजमेर की माटी से संस्कार पाकर वर्ष 2005 में वायुसेना की नीली वर्दी धारण करने वाले यशपाल मीणा ने 20 वर्षों की गौरवशाली सेवा के बाद सेवानिवृत्ति लेकर जब प्रतापगढ़ की धरा पर कदम रखा, तो गांधी चौराहा देशभक्ति के नारों और ढोल-नगाड़ों की थाप से गुंजायमान हो उठा।
यशपाल मीणा का सैन्य सफर अनुशासन और अदम्य साहस की एक मिसाल रहा है। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर की बर्फीली चोटियों से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों के दुर्गम जंगलों और देश के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में राष्ट्र की सुरक्षा का दायित्व निभाया। 31 दिसंबर 2025 को गाजियाबाद वायुसेना स्टेशन से आधिकारिक रूप से सेवानिवृत्त होने के बाद जैसे ही उनके गृह जनपद आगमन की सूचना मिली, परिजनों और मित्रों का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया।
गांधी चौराहे पर आयोजित इस भव्य अभिनंदन समारोह में जैसे ही यशपाल मीणा पहुंचे, युवाओं ने ढोल की थाप पर थिरकते हुए उनका स्वागत किया। मित्रों और स्वजनों ने पुष्पहारों से उन्हें लाद दिया, वहीं परिवार की बुजुर्ग महिलाओं की आंखों में गर्व के आंसू और चेहरे पर मुस्कान साफ झलक रही थी। इस गौरवमयी अवसर पर भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) के पूर्व विधायक प्रत्याशी मांगीलाल ननमा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सैनिक के साहस की सराहना की। कार्यक्रम का समन्वय कर रहे शिक्षक चंद्र प्रकाश मीणा ने बताया कि मूल रूप से बुज रामपुरिया निवासी यशपाल मीणा का जीवन क्षेत्र के युवाओं के लिए राष्ट्र सेवा की एक प्रेरणा है।
वहां उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में कहा कि दुर्गम परिस्थितियों और सीमावर्ती इलाकों में रहकर देश की रक्षा करना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सर्वोच्च त्याग है। यशपाल मीणा जैसे जांबाज सैनिकों के कारण ही आज देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और आम नागरिक चैन की सांस ले पा रहा है। स्वागत समारोह के अंत में सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। यह क्षण केवल एक सैनिक की घर वापसी का नहीं था, बल्कि एक कृतज्ञ समाज द्वारा अपने रक्षक के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक जीवंत उदाहरण बन गया।

Dilip Sen, Pratapgarh
नाम: दिलीप सेन
वर्तमान पद: रिपोर्टर, जिला मुख्यालय (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: प्रतापगढ़ जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति, और धर्म-कर्म
परिचय
दिलीप सेन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले और जिला मुख्यालय से जुड़े आपराधिक मामलों (क्राइम), स्थानीय राजनीति और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों (धर्म-कर्म) की खबरों को कवर करते हैं। इन विषयों में उनकी विशेष रुचि और अच्छी पकड़ है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
दिलीप सेन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न प्रिंट और डिजिटल न्यूज़ चैनलों के साथ काम करने का अनुभव है। वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक भास्कर
- सीधा सवाल
- सच बेधड़क न्यूज़ चैनल
- प्रातः काल (जिसके साथ वह साल 2025 से निरंतर जुड़े हुए हैं)
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास तक पूरी की है।
