चित्तौड़गढ़। जीवन की अंतिम यात्रा में भी किसी के लिए प्रकाश बिखेरने का अद्भुत उदाहरण सोमवार को सामने आया। गांधीनगर निवासी सज्जन देवी के आकस्मिक निधन के बाद उनके परिवार ने अत्यंत मानवता और सेवा भाव से मरणोपरांत नेत्रदान का निर्णय लिया, जिससे दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि प्राप्त होगी।

परिवार के आग्रह और उपस्थिति में महावीर इंटरनेशनल द्वारा नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न करवाई गई। इस मौके पर महावीर इंटरनेशनल के सी एम बोकड़िया, प्रकाश पोखरान, बसंती लाल मेहता और सी पी जैन मौजूद थे।

महावीर इंटरनेशनल नेत्र चिकित्सालय के विशेषज्ञ डॉ. वसीम खान और भावना छीपा ने कॉर्निया उत्सर्जन की संवेदनशील प्रक्रिया पूरी की। प्राप्त दोनों नेत्र अब दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में प्रकाश का माध्यम बनेंगे, जिससे उनकी दुनिया नई रोशनी से भर जाएगी।

इस मानवतापूर्ण कदम ने न केवल सज्जन देवी के परिवार की उदारता और संवेदनशीलता को उजागर किया, बल्कि समाज में नेत्रदान की महत्ता और इसके दूरगामी प्रभाव को भी प्रदर्शित किया। विशेषज्ञों के अनुसार, मरणोपरांत नेत्रदान एक ऐसा पुण्य कार्य है, जो न केवल जरूरतमंदों की दृष्टि लौटाता है, बल्कि समाज में सेवा और सहानुभूति की भावना को भी प्रेरित करता है।

सज्जन देवी के इस कदम ने यह संदेश दिया कि जीवन केवल जीने तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता और सेवा की शक्ति से उसकी अंत्य यात्रा भी दूसरों के जीवन में उजाला भर सकती है।

Pratahkal Bureau

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