भूपालसागर में पीएम किसान सम्मान निधि का उत्सव: कपासन क्षेत्र के 75 हजार किसानों के खाते हुए मालामाल
क्या भूपालसागर के किसानों को मिला 23वीं किस्त का लाभ? प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल हस्तांतरण से कपासन क्षेत्र के 75 हजार किसानों के खातों में बरसी खुशियां। जानिए क्या है इस बड़े सरकारी कार्यक्रम की पूरी कहानी और किसानों के लिए इसके मायने।

भूपालसागर के महाराणा प्रताप सभागार में पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त के डिजिटल हस्तांतरण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखते हुए विधायक अर्जुन लाल जीनगर और स्थानीय किसान।
अन्नदाताओं के चेहरों पर उस समय खुशी की लहर दौड़ गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर से पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त का डिजिटल हस्तांतरण किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर के गवाह बने भूपालसागर का महाराणा प्रताप सभागार, जहां आयोजित लाइव प्रसारण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान उमड़ पड़े। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल का सीधा लाभ कपासन विधानसभा क्षेत्र के हजारों किसानों को मिला, जिससे क्षेत्र के कृषि परिदृश्य में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कपासन विधायक अर्जुन लाल जीनगर ने बताया कि इस कड़ी में कपासन विधानसभा क्षेत्र के लगभग 75 हजार किसानों के बैंक खातों में कुल 15 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे पहुंचाई गई है। विशेष रूप से भूपालसागर क्षेत्र के 20 हजार पंजीकृत किसानों को 2-2 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई है, जिससे कुल 4 करोड़ रुपये का सीधा आर्थिक लाभ यहां के कृषकों को मिला है। विधायक ने केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि किसानों का आर्थिक सशक्तिकरण वर्तमान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यह योजना उनके जीवन स्तर को सुधारने में एक मजबूत स्तंभ साबित हो रही है।
इस गरिमामय आयोजन में भाजपा जिला प्रभारी विमल अग्रवाल, मंडल अध्यक्ष हेमेंद्र सिंह, आकोला भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष शंकरलाल साहू, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष शंभूलाल गाडरी तथा मंडल महामंत्री कमलेश गाडरी सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग की ओर से सहायक कृषि अधिकारी प्रभुलाल खटीक ने किसानों को विभागीय बुकलेट और मार्गदर्शिकाएं वितरित कीं, ताकि वे सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने में सक्षम बन सकें। पूर्व पंचायत समिति सदस्य सुरेशचंद्र गाडरी और प्रशासक प्यारचंद भील की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक सुदृढ़ बनाया। यह आयोजन न केवल एक वित्तीय हस्तांतरण था, बल्कि सरकार और किसान के बीच के विश्वास को और अधिक प्रगाढ़ करने का एक जीवंत प्रतीक बनकर संपन्न हुआ।

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