चित्तौड़गढ़ में 'ऑपरेशन विष हरण' का महाधमाका: खाकी ने ध्वस्त किया नशे का किला, पहली बार पकड़ी गई हाईटेक एमडी फैक्ट्री
चित्तौड़गढ़ पुलिस ने 'ऑपरेशन विष हरण' के तहत अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक हाईटेक एमडी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। 100 जवानों की टीम ने भारी मात्रा में नकदी, ड्रोन, 33 मोबाइल और ड्रग बनाने के केमिकल जब्त कर अंतर-जिला तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया। पुलिस की इस ऐतिहासिक दबिश से नशे के सौदागरों में हड़कंप मच गया है।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में पुलिस ने नशे के सौदागरों के विरुद्ध अब तक की सबसे भीषण और ऐतिहासिक स्ट्राइक की है। उदयपुर रेंज आईजी द्वारा चलाए जा रहे "ऑपरेशन विष हरण" के तहत पुलिस ने न केवल अंतर-जिला तस्करी नेटवर्क को नेस्तनाबूद किया, बल्कि एक ऐसी हाईटेक एमडी फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है जो तकनीक और संसाधनों के मामले में किसी कॉर्पोरेट ऑफिस से कम नहीं थी। पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी के कुशल नेतृत्व में महीनों से बुने गए जाल में आखिरकार नशे के वो बड़े मगरमच्छ फंस ही गए, जो मेवाड़ की धरा पर जहर घोलने का काला साम्राज्य चला रहे थे।
इस सनसनीखेज कार्रवाई की शुरुआत कोतवाली थानाधिकारी तुलसीराम प्रजापत द्वारा सत्तू माली और जीवन वैष्णव की गिरफ्तारी से हुई। इनके पास से क्रमशः 6 ग्राम और 2 ग्राम एमडी (मैफेड्रोन) बरामद की गई थी। शुरुआत में यह एक सामान्य गिरफ्तारी लग रही थी, लेकिन जब आरोपियों से तकनीकी विश्लेषण और सघन पूछताछ की गई, तो परतें दर परत हकीकत सामने आने लगी। कड़ियां जुड़ते ही एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस जहर की सप्लाई का मुख्य केंद्र ग्राम जीवा नायकों का खेड़ा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) सरिता सिंह के निर्देशन में एक विशाल संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस ऑपरेशन की कमान सीओ गंगरार शिवन्या सिंह और सीओ सिटी बृजेश सिंह को सौंपी गई, जिसमें 8 थानों के थानाधिकारी और करीब 100 पुलिस जवानों का भारी लश्कर शामिल था। टीम ने जब गंगरार क्षेत्र के जीवा नायकों का खेड़ा में जगदीश पुत्र तुलसीराम बंजारा, अशोक पुत्र जगदीश बंजारा और राहुल पुत्र जगदीश बंजारा के ठिकानों पर दबिश दी, तो वहां का नजारा देखकर अनुभवी पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। हालांकि, मुख्य अभियुक्त पुलिस की भनक लगते ही पहाड़ियों का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहे, लेकिन उनके पीछे छूटा साजो-सामान उनकी पूरी सल्तनत की गवाही दे रहा था।
पुलिस ने मौके से 6 ग्राम स्मैक, 69 ग्राम टांका, देशी शराब और एमडी निर्माण का पूरा जखीरा बरामद किया। जब्त सामग्री में एसिटिक एसिड, सोडियम कार्बाेनेट, सोडा ऐश, इमामेक्टिन बेंजोएट और एसिटाइल क्लोराइड जैसे रसायनों के साथ-साथ मास्क, रेस्पिरेटर सेट, एल्युमिनियम फॉयल और एमडी छानने के विशेष कपड़े मिले। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि तस्कर अपनी सुरक्षा और नेटवर्क के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस ने वहां से 4 लैपटॉप, 33 मोबाइल फोन, एक हाई-डेफिनिशन कैमरा, निगरानी के लिए ड्रोन सेट, नोट गिनने की मशीन और 14 लाख 16 हजार 950 रुपये की भारी नकदी बरामद की। इसके साथ ही एक हुंडई क्रेटा कार और दो मोटरसाइकिलें भी जब्त की गईं।
भारी मात्रा में डिजिटल उपकरणों और ड्रोन की बरामदगी यह स्पष्ट करती है कि यह नेटवर्क तकनीकी रूप से अत्यंत सुदृढ़ और अंतर-जिला स्तर पर सक्रिय था। चित्तौड़गढ़ पुलिस की इस जीरो टॉलरेंस कार्रवाई ने न केवल नशे की एक बड़ी खेप को बाजार में जाने से रोका है, बल्कि संगठित अपराध की कमर तोड़ दी है। यह कार्रवाई जिले के इतिहास में मादक पदार्थों के विरुद्ध अब तक का सबसे बड़ा प्रहार माना जा रहा है, जिसने तस्करी के सिंडिकेट में हड़कंप मचा दिया है।

Pratahkal Bureau
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