चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की ऐतिहासिक धरा आज स्वामी विवेकानंद के ओजस्वी विचारों और युवाओं के जोश से सराबोर हो उठी। अवसर था स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस का, जिसे आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा के निर्देशों के अनुपालन में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा एक वृहद उत्सव के रूप में मनाया गया। शहर की सड़कों पर जब 'स्वदेशी संकल्प दौड़' और 'युवा जागरूकता रैली' निकली, तो राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भरता का संदेश जन-जन तक पहुँच गया। इस आयोजन ने न केवल युवाओं को शारीरिक फिटनेस के प्रति सचेत किया, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम भी प्रदान किया।

कार्यक्रम का गरिमामय शुभारंभ कलेक्ट्री प्रांगण से हुआ, जहाँ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. हेमेंद्रनाथ व्यास ने हरी झंडी दिखाकर दौड़ को रवाना किया। इस दौरान प्रो. व्यास ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वदेशी अपनाना केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति हमारे स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए प्रेरित किया। इस दौड़ में विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने अदम्य उत्साह के साथ भाग लिया, जिससे पूरा मार्ग विवेकानंद के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

महाविद्यालय की वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. भारती मेहता ने युवाओं के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हुए उन्हें लक्ष्य साधना और राष्ट्रीय एकता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में युवाओं की सकारात्मक सोच ही देश की दिशा तय करेगी। आयोजन को सफल और अनुशासित बनाने में पुलिस विभाग एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने सुरक्षा, मार्ग निर्धारण और समन्वय में सराहनीय भूमिका निभाई। विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्वयंसेवकों के पंजीकरण और प्रमाण-पत्र वितरण की प्रक्रियाओं को भी सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न किया गया।

रैली के पश्चात महाविद्यालय परिसर में आयोजित प्रेरक वक्तव्य कार्यक्रम में वक्ताओं ने वैचारिक गहराई के साथ अपनी बात रखी। महिपाल दान एवं मीनाक्षी चौधरी ने 'युवा एवं राष्ट्र निर्माण' विषय पर प्रभावी संबोधन देते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने शताब्दी पूर्व थे। उन्होंने युवाओं को सेवा भाव, अनुशासन और मानवता के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। इस संपूर्ण आयोजन के सफल क्रियान्वयन में राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी डॉ. हेमलता महावर के साथ बालकृष्ण लड्ढा, सुशील काबरा और भारती भावनानी का विशेष योगदान रहा।

स्वदेशी जागरण मंच के प्रतिनिधि श्री प्रहलाद शर्मा ने भी इस अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए युवाओं की भागीदारी को सराहा। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्यों की उपस्थिति में यह संकल्प लिया गया कि विवेकानंद के आदर्शों को केवल नारों तक सीमित न रखकर उन्हें जीवन के व्यवहार में लाया जाएगा। इस आयोजन ने न केवल युवाओं को सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराया, बल्कि चित्तौड़गढ़ के शैक्षिक परिदृश्य में एक नई ऊर्जा का संचार भी किया।

Pratahkal Newsroom

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