चित्तौड़गढ़ में भक्ति का महासागर: उत्तम स्वामी महाराज की भागवत कथा का भव्य समापन, सामाजिक समरसता और सेवा का दिया संदेश
चित्तौड़गढ़ के रतन बाग में महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी महाराज की सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का भव्य समापन हुआ। सामाजिक समरसता, महिला सम्मान और सेवा की प्रेरणा देते हुए महाराज ने रुक्मिणी विवाह और शिशुपाल वध के प्रसंग सुनाए। इस धार्मिक आयोजन में विधायक चंद्रभान सिंह आक्या सहित कई गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

चित्तौड़गढ़। धर्म नगरी चित्तौड़गढ़ के स्थानीय रतन बाग में पिछले सात दिनों से प्रवाहित हो रही श्रीमद्भागवत कथा की अमृतधारा का समापन अत्यंत गरिमामय और भक्तिपूर्ण वातावरण में हुआ। सनातन गौरव समिति के तत्वावधान में आयोजित इस आध्यात्मिक महोत्सव के अंतिम दिन महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी महाराज ने अपने ओजस्वी मुखारबिंद से न केवल पौराणिक आख्यानों की व्याख्या की, बल्कि उन्हें वर्तमान सामाजिक सरोकारों से जोड़कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बसंत पंचमी के पावन पर्व पर कथा के विश्राम दिवस के अवसर पर गौ दान और सेवा के महत्व पर विशेष बल दिया गया। रुक्मिणी विवाह के प्रसंग को जब महाराज ने जीवंत किया, तो पूरा पांडाल गाजे-बाजे और हर्षोल्लास के साथ झूम उठा, मानो साक्षात् द्वारकापुरी का दृश्य रतन बाग में उतर आया हो।
कथा के सातवें दिन उत्तम स्वामी महाराज ने महाभारत और अश्वमेध यज्ञ के प्रसंगों को सामाजिक समरसता के अनुपम उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि उस कालखंड में जब 42 लाख लोगों की भोजन पंगत बिना किसी जाति या वर्ण के भेदभाव के एक साथ लगती थी, तब स्वयं भगवान श्री नारायण ने जूठी पत्तलें उठाकर सेवा और समर्पण की वह पराकाष्ठा प्रस्तुत की, जो आज के समाज के लिए सबसे बड़ी सीख है। इसके साथ ही उन्होंने शिशुपाल वध के प्रसंग को महिला सम्मान और सुरक्षा की दृष्टि से परिभाषित किया। उन्होंने भावपूर्ण ढंग से वर्णन किया कि सुदर्शन चक्र चलाते समय जब भगवान की अंगुली में चोट लगी, तब द्रौपदी ने बिना क्षण गँवाए अपनी साड़ी का पल्लू चीरकर पट्टी बांधी थी। इसी त्याग और स्नेह का ऋण भगवान ने द्रौपदी के चीरहरण के समय उनकी रक्षा कर चुकाया।
राजेंद्र गगरानी के अनुसार, इस भव्य आयोजन का शुभारंभ हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। समापन अवसर पर क्षेत्र की दिग्गज राजनीतिक और सामाजिक विभूतियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें संघ के राष्ट्रीय सह मंत्री गजेंद्र सिंह, विधायक चंद्रभान सिंह आक्या, अर्जुन लाल जीनगर, भाजपा जिलाध्यक्ष रतनलाल गाडरी और जिला कोषाधिकारी दिग्विजय सिंह झाला प्रमुख रहे। इनके साथ ही गीतादेवी योगी, नानालाल भूतड़ा, ललित शारदा, सागर सोनी, पूरण अहीर, शिवलाल धाकड़, हेमंत आगीवाल, अशोक रायका, लिटिल भट्ट और शांतनु काबरा जैसे गणमान्य जन मौजूद थे।
इस सफल आध्यात्मिक अनुष्ठान के सूत्रधार रहे समिति के सदस्यों का महाराज ने विशेष अभिनंदन किया। प्रवीण टांक, शैलेंद्र झंवर, अनिल ईनाणी, विश्वनाथ टांक, महेंद्र सिंह सिसोदिया, पं राकेश शास्त्री, राधेश्याम अमेरिया, रवि मेनारिया, जगदीश मंडोवरा, राजकुमार कुमावत, राजकुमार तोलंबिया, संजय शर्मा, रवि वीराणी, विनीत तिवारी, रामप्रसाद बघेरवाल, दीपक वर्मा, पंकज सेन, दीनदयाल भारद्वाज, विक्रम गवारिया, कुलदीप शर्मा, पीनू मेनारिया, अरविंद तोषनीवाल, अशोक पलोंड़, मुदित मेनारिया, सुशीला कंवर, लीला आग़ाल, भावना न्याति, मंजू तोषनीवाल, विमला गट्टाणी, ज्योति तिवाड़ी, रेखा शक्तावत, सीमा गगरानी और रेणु झंवर तथा अनीता टांक को उत्तम स्वामी महाराज ने उपरना ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर आशीर्वाद प्रदान किया। यह सात दिवसीय आयोजन चित्तौड़गढ़ के इतिहास में भक्ति, सेवा और सामाजिक एकता के एक नए अध्याय के रूप में अंकित हो गया है।

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