निंबाहेड़ा: वाल्मीकि समाज का प्रथम निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित
विधायक श्रीचंद कृपलानी ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया; डॉ. अंबेडकर जयंती पर मेवाड़ वाल्मीकि सेवा संस्था द्वारा दशहरा मैदान में भव्य आयोजन संपन्न।

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के निंबाहेड़ा स्थित दशहरा मैदान में भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के पावन उपलक्ष्य पर मेवाड़ वाल्मीकि सेवा संस्था, चित्तौड़गढ़ एवं प्रगतिशील मेवाड़ वाल्मीकि सेवा संस्था, निंबाहेड़ा के संयुक्त तत्वावधान में वाल्मीकि समाज के प्रथम निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन 2026 का ऐतिहासिक और गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। सामाजिक एकता, समरसता को सुदृढ़ करने तथा कुरीतियों के उन्मूलन के उद्देश्य से आयोजित इस भव्य समारोह में विशाल संख्या में समाजजन, प्रबुद्ध नागरिक और विशिष्ट जन प्रतिनिधि सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व यूडीएच मंत्री एवं विधायक श्रीचंद कृपलानी ने परिणय सूत्र में बंधे नव विवाहित जोड़ों को अपना स्नेहिल आशीर्वाद प्रदान करते हुए उनके सुखद दांपत्य जीवन की मंगल कामना की। समारोह में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष हकरु भाई मईडा (मीणा), भाजपा जिला प्रभारी विमल अग्रवाल (जयपुर), भाजपा जिला अध्यक्ष रतनलाल गाडरी, पूर्व विधायक अशोक नवलखा, निवर्तमान जिला प्रमुख गब्बर सिंह अहीर तथा निवर्तमान प्रधान बगदीराम धाकड़ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त सीपी नामधारणी, पूर्व नगर अध्यक्ष नितिन चतुर्वेदी, नगर अध्यक्ष कपिल चौधरी, पूर्वी नगर अध्यक्ष अशोक जाट, पश्चिमी मंडल अध्यक्ष राजेंद्र सिंह शक्तावत, नगर महामंत्री देवकरण समदानी, कमलेश बुनकर और ग्रामीण मंडल महामंत्री राधेश्याम टेलर सहित अनेक भाजपा पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
समारोह के प्रारंभ में समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा अतिथियों का पारंपरिक मेवाड़ी रीति-रिवाज से उपरना ओढ़ाकर एवं साफा बंधवाकर आत्मीय अभिनंदन किया गया। विधायक श्रीचंद कृपलानी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में सामूहिक विवाह को समाज की नई दिशा का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि वर्तमान दौर में विवाहों में बढ़ते अनावश्यक प्रदर्शन और फिजूलखर्ची से मध्यम व कमजोर वर्ग पर जो आर्थिक दबाव आता है, यह निःशुल्क आयोजन उसे समाप्त कर एक आदर्श समाज की स्थापना करता है। उन्होंने बल देकर कहा कि ऐसे आयोजन आपसी भाईचारे और समरसता को बल देते हैं तथा दहेज प्रथा एवं आडंबरों पर प्रभावी अंकुश लगाते हैं। कृपलानी ने शिक्षा और संस्कारों को प्रगति का आधार बताते हुए युवाओं से नैतिक मूल्यों के साथ समाज निर्माण में भूमिका निभाने का आह्वान किया।
संपूर्ण आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित और गरिमामय वातावरण में संचालित हुआ, जहाँ वक्ताओं ने सामूहिक विवाह को सामाजिक बोझ कम करने वाली एक सराहनीय पहल बताया। अंत में आयोजक संस्थाओं ने सभी सहयोगियों, दानदाताओं और समाजजनों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार के सामाजिक सरोकारों को निरंतर जारी रखने का दृढ़ संकल्प लिया। यह आयोजन समाज में समानता, सहयोग और सकारात्मक परिवर्तन के एक नए युग का सूत्रपात सिद्ध हुआ।

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