श्रमण संघीय उपाध्याय डॉ. श्री गौतममुनि जी म.सा. ने जैन दिवाकर भवन में आत्मसिद्धि के लिए समभाव को अनिवार्य बताया।

निम्बाहेड़ा। संसार की विषमताओं के बीच समभाव ही आत्मसिद्धि का एकमात्र मार्ग है और इसके बिना मोक्ष की प्राप्ति असंभव है। यह उद्गार श्रमण संघीय उपाध्याय पूज्य डॉ. श्री गौतममुनि जी म.सा. ने नगर की आदर्श कॉलोनी स्थित श्री जैन दिवाकर भवन में आयोजित प्रातःकालीन धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

उपाध्याय श्री ने अपने ओजस्वी प्रवचन में कहा कि यह संसार राग-द्वेष, मान-अपमान, लाभ-हानि और सुख-दुःख जैसी विपरीत परिस्थितियों का केंद्र है। ऐसे में जो साधक इन द्वंद्वों के बीच समभाव को अक्षुण्ण रखता है, वही आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हो सकता है। उन्होंने भगवान महावीर स्वामी को समता का सिंधु बताते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहकर उन्होंने समता का सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत किया। उपाध्याय श्री ने स्पष्ट किया कि समता का वास्तविक आधार भावनाओं की शुद्धि है। जब तक अंतर्मन के विकार पूर्णतः समाप्त नहीं होते, तब तक वास्तविक समता का विकास संभव नहीं है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने मन को निर्मल बनाने का निरंतर प्रयास करना चाहिए।

धर्मसभा में आगम ज्ञाता एवं मेवाड़ रत्न पूज्य श्री वैभवमुनि जी म.सा. ने भी अपने प्रेरक उद्बोधन के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार एवं आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हुए विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया। इस महत्वपूर्ण आध्यात्मिक आयोजन में अखिल भारतीय श्री जैन दिवाकर संगठन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आई. एम. सेठिया विशेष रूप से उपस्थित रहे। श्री जैन दिवाकर भवन में आयोजित इस धर्मसभा में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रावक-श्राविकाओं ने गुरुदेवों के मंगलमय प्रवचनों का श्रवण कर धर्म लाभ अर्जित किया।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story