निम्बाहेडा: बोर्ड परीक्षा में श्रेष्ठता के लिए शिक्षकों का अनूठा संकल्प, 'घर-घर दस्तक' से संवर रहा बालिकाओं का भविष्य
निम्बाहेडा के कनेरा राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्रिंसिपल सावित्री गुप्ता और शिक्षकों ने बोर्ड परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए 'घर-घर संपर्क' अभियान शुरू किया है। विज्ञान शिक्षक इन्द्र मल धाकड और सुरेन्द्र कुमार मीणा ने अभिभावकों को बालिकाओं की पढ़ाई में सहयोग करने और उन्हें मोबाइल व घरेलू कार्यों से दूर रखने के लिए प्रेरित किया। परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए अब विद्यालय में एक्स्ट्रा क्लास भी लगाई जाएंगी।

निम्बाहेडा। शिक्षा के क्षेत्र में केवल कक्षाओं के भीतर दिया गया ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि एक विद्यार्थी के घर का वातावरण और उसके अभिभावकों का सहयोग भी सफलता की आधारशिला रखता है। इसी ध्येय को चरितार्थ करते हुए निम्बाहेडा के कनेरा स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक स्टाफ ने बोर्ड परीक्षा परिणामों में उन्नयन हेतु एक प्रेरक और नवाचारी पहल की शुरुआत की है। विद्यालय प्रशासन अब केवल स्कूल की चारदीवारी तक सीमित न रहकर, बालिकाओं के घर की दहलीज तक पहुँच रहा है ताकि कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में छात्राओं के प्रदर्शन को निखारा जा सके।
इस अभियान का नेतृत्व स्वयं विद्यालय की प्रिंसिपल सावित्री गुप्ता द्वारा किया जा रहा है। उच्चाधिकारियों से प्राप्त दिशा-निर्देशों की अक्षरशः पालना करते हुए उन्होंने एक विशेष निरीक्षण दल का गठन किया है, जो सुबह और शाम के समय सीधे छात्राओं के घर जाकर उनकी पढ़ाई का जायजा ले रहा है। इस दल में विज्ञान एवं गणित के विशेषज्ञ शिक्षक इन्द्र मल धाकड तथा शिक्षक सुरेन्द्र कुमार मीणा सहित अन्य स्टाफ सदस्य सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। शिक्षकों की यह टीम जब कनेरा की तंग गलियों और खेतों तक पहुँची, तो शिक्षा और सामाजिक परिवेश की मिली-जुली तस्वीर सामने आई।
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि जहाँ कुछ बालिकाएं पूरी तन्मयता से अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं, वहीं कुछ छात्राएं घरेलू मजबूरियों के चलते खेती के कार्यों में माता-पिता का हाथ बंटा रही हैं। शिक्षकों ने यह भी अनुभव किया कि आधुनिक युग का अभिशाप माना जाने वाला मोबाइल गेम भी कुछ छात्राओं की एकाग्रता में बाधक बन रहा है। इस जमीनी हकीकत को देखते हुए प्रिंसिपल सावित्री गुप्ता के निर्देशन में शिक्षकों ने अभिभावकों के साथ गहन संवाद किया। उन्होंने अभिभावकों से विशेष आग्रह किया कि वे बोर्ड परीक्षा के महत्व को समझें और परीक्षा के दौरान अपनी बेटियों को खेती या अन्य घरेलू कार्यों से मुक्त रखें। शिक्षकों ने इस बात पर जोर दिया कि घर में पढ़ाई का एक सकारात्मक वातावरण तैयार करना अनिवार्य है, जिसमें मोबाइल जैसी बाधाओं का कोई स्थान न हो।
शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विद्यालय ने विषयवार शिक्षकों की एक विशेष टीम भी तैयार की है। छात्राओं को ढांढस बंधाते हुए शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें किसी भी विषय में, विशेषकर गणित या विज्ञान जैसे जटिल विषयों में कोई समस्या आती है, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के संबंधित शिक्षक से संपर्क कर समाधान प्राप्त कर सकती हैं। अभिभावकों को बोर्ड परीक्षा की बारीकियों और तनाव मुक्त पढ़ाई के तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया गया। बालिकाओं के मनोबल को बढ़ाने के लिए विज्ञान शिक्षक इंद्र मल धाकड और गणित शिक्षक सुरेन्द्र मीणा ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में बैठने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि आगामी दिनों में विद्यार्थियों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए स्कूल परिसर में ही अतिरिक्त कक्षाओं (एक्स्ट्रा क्लास) का आयोजन किया जाएगा। यह पहल न केवल विद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि समाज और शिक्षण संस्थान के बीच बढ़ती दूरी को कम करने का एक सशक्त माध्यम भी बनकर उभरी है।

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