निंबाहेड़ा: बोर्ड परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए शिक्षकों ने थामी कमान, घर-घर पहुंचकर मोबाइल गेम की लत पर जताई चिंता
निंबाहेड़ा के लसडावन विद्यालय के प्रधानाचार्य रतनलाल मेघवाल और स्टाफ ने परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए गांवों में घर-घर जाकर 'संपर्क अभियान' शुरू किया है। इस दौरान मोबाइल गेम 'फ्री फायर' की लत पर चिंता जताते हुए अभिभावकों से बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने की अपील की गई। शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षकों की इस अनूठी पहल और एक्स्ट्रा क्लास की योजना की पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।

निंबाहेड़ा। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लसडावन के शैक्षणिक स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और आगामी बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विद्यालय प्रशासन ने एक अनूठी और अनुकरणीय पहल शुरू की है। परीक्षा परिणाम उन्नयन के संकल्प के साथ विद्यालय का स्टाफ अब केवल कक्षाओं तक सीमित न रहकर सीधे विद्यार्थियों के घर तक पहुंच रहा है। इस विशेष अभियान के तहत शिक्षकों की टोली आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तक देकर अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक कर रही है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य रतनलाल मेघवाल के नेतृत्व में शुरू हुए इस जनसंपर्क अभियान के दौरान शिक्षकों ने झड़सादड़ी, मंडावली, चंगेड़ी और लसडावन जैसे गांवों का दौरा करना तय किया है। इसी क्रम में स्वयं प्रिंसिपल रतनलाल मेघवाल, विज्ञान एवं गणित विषय के विशेषज्ञ राधेश्याम धाकड़ और शिक्षक कांतिलाल लखारा ने झड़सादड़ी गांव में छात्र-छात्राओं और उनके परिजनों से सीधा संवाद स्थापित किया। घर-घर जाकर किए गए इस औचक निरीक्षण के दौरान कुछ चिंताजनक तो कुछ उत्साहजनक पहलू सामने आए।
शिक्षकों के इस जमीनी सर्वे में यह तथ्य उभर कर आया कि आधुनिक तकनीक और मोबाइल का दुरुपयोग विद्यार्थियों की एकाग्रता में बड़ी बाधा बन रहा है। संपर्क के दौरान कई विद्यार्थी मोबाइल फोन पर 'फ्री फायर' जैसे गेम में मशगूल पाए गए, जो उनकी शिक्षा और भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है। हालांकि, इस दौरान कुछ छात्र अपने सुनहरे भविष्य के लिए कड़ी मेहनत और लगन से पढ़ाई करते हुए भी नजर आए।
प्रधानाचार्य रतनलाल मेघवाल ने अभिभावकों से अत्यंत भावुक और संजीदा अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखें। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों को मोबाइल की आभासी दुनिया से दूर रखकर पढ़ाई के लिए एक सकारात्मक वातावरण प्रदान करना अभिभावकों की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जिन विद्यार्थियों के घर पर पढ़ाई का उपयुक्त माहौल नहीं है, उनके लिए विद्यालय परिसर में ही अतिरिक्त कक्षाओं (एक्स्ट्रा क्लास) की विशेष व्यवस्था की जाएगी, ताकि कोई भी बच्चा संसाधनों या मार्गदर्शन के अभाव में पीछे न रहे।
शिक्षकों की यह सक्रियता न केवल शिक्षा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक क्रांति का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है। विद्यालय स्टाफ का यह सामूहिक प्रयास आने वाले परीक्षा परिणामों में एक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे क्षेत्र के विद्यार्थियों का भविष्य उज्जवल होने की उम्मीद जगी है।

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