शिक्षकों का समर्पण: बडोली माधोसिंह के शिक्षक रात में घर-घर जाकर दे रहे पढ़ाई के टिप्स
निम्बाहेडा के बडोली माधोसिंह स्कूल के शिक्षक बोर्ड परीक्षा की तैयारी हेतु देर रात विद्यार्थियों के घर जाकर मोबाइल की लत और पढ़ाई के प्रति अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं।

बडोली माधोसिंह विद्यालय के प्रधानाचार्य और शिक्षक देर रात छात्र के घर पहुँचकर बोर्ड परीक्षा की तैयारी और मोबाइल के दुष्प्रभावों के बारे में अभिभावक से चर्चा करते हुए।
एक तरफ राज्य सरकार शिक्षकों से हर तरह के गैर शैक्षणिक कार्य करवा रही है और यहां तक कि परीक्षाओं में भी शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त कर विद्यार्थियों की पढ़ाई को बाधित किया जा रहा है।
समर्पण की अनूठी मिसाल
दूसरी और बडोली माधोसिंह में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक प्रधानाचार्य के साथ मिलकर दिन में बोर्ड परीक्षार्थियों को पढ़ाने के साथ-साथ देर रात तक उनके घरों पर जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाई के टिप्स प्रदान कर रहे हैं एवं अभिभावकों को बोर्ड परीक्षा की तैयारी में विद्यार्थियों का सहयोग करने का आग्रह कर रहे हैं।
अभावों के बीच पढ़ाई की भरपाई
बडोली माधोसिंह के प्रधानाचार्य रविंद्र कुमार उपाध्याय ने बताया कि:
- "इस वर्ष शिक्षकों को एस आई आर में लगाने से और विद्यालय में गणित, अंग्रेजी आदि विषयों के पद रिक्त होने से पढ़ाई बाधित हुई है।"
- "साथ ही एक माह पूर्व परीक्षाएं प्रारंभ हो जाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए बडोली माधोसिंह स्कूल के शिक्षक प्रधानाचार्य के साथ भट्टकोटडी, सांगरिया, बोराखेड़ी, बडोली माधोसिंह आदि गांवों में देर रात तक विद्यार्थियों के घरों पर दस्तक दे कर उन्हें पढ़ाई के लिए जागरुक कर रहे हैं।"
ग्रामीण परिवेश और मोबाइल की चुनौतियां
व्याख्याता जय सिंह मीणा और रामेश्वर लाल मेघवाल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में कृषक एवं श्रमिक वर्ग दिन भर कड़ी मेहनत करके घर आते हैं तो वह रात्रि में जल्दी सो जाते है, जिससे अभिभावकों के साथ-साथ उनके बच्चे भी जल्दी सो जाते हैं। इसके अतिरिक्त माता-पिता छोटे छोटे बच्चों को मोबाइल दे कर उन्हें मानसिक रोगी बना रहे हैं।
विद्यार्थियों द्वारा मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से उनका मस्तिष्क सृजनात्मक कार्य में लगता ही नहीं है और उनकी स्मरण शक्ति क्षीण होती जा रही है। इन समस्याओं के निराकरण हेतु शिक्षक साथी विद्यार्थियों के घरों में जाकर अभिभावकों की काउंसलिंग कर रहे हैं।
मोबाइल की लत से विद्यार्थियों की दिमागी हालत खराब
प्रधानाचार्य उपाध्याय ने बताया कि मोबाइल की लत ने विद्यार्थियों की दिमागी हालत खराब कर दी है। हालात इतने विकट है कि कई विद्यार्थी सोते समय रजाई में मोबाइल का प्रयोग करते हैं और मोबाइल के साथ ही सोते हैं।
इससे उनकी आंखों की रोशनी और याददाश्त खत्म हो रही है और उनमें चिड़चिड़ापन दिखाई दे रहा है। यह विद्यार्थियों के लिए घातक होता जा रहा है। अतः देर रात तक अभिभावकों के साथ जीवंत संपर्क कर विद्यार्थियों के साथ साथ अभिभावकों की भी काउंसलिंग की जा रही है।

Pratahkal Bureau
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