निंबाहेड़ा: पीएमश्री स्कूल के विद्यार्थियों ने उदयपुर में जाना शौर्य और विज्ञान का संगम, 'राष्ट्रीय आविष्कार अभियान' के तहत हुआ भव्य शैक्षणिक भ्रमण
निंबाहेड़ा के पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ने 'राष्ट्रीय आविष्कार अभियान' के तहत 140 विद्यार्थियों के लिए उदयपुर और हल्दीघाटी का विशेष शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया। प्रताप गौरव केंद्र से लेकर मोलेला की हस्तशिल्प कला तक, छात्रों ने शौर्य गाथाओं और आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों का गहन अनुभव प्राप्त किया। शिक्षा और विज्ञान के इस अनूठे संगम की विस्तृत रिपोर्ट।

निंबाहेड़ा। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक अनुभव और अन्वेषण ही विद्यार्थियों के भविष्य की नींव रखते हैं। इसी ध्येय को सार्थक करते हुए पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, निंबाहेड़ा के लगभग 140 छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रीय आविष्कार अभियान (RAA) के अंतर्गत एक अविस्मरणीय शैक्षणिक भ्रमण किया। प्रधानाचार्य श्री मनोहर लाल जैन ने प्रातः 6:00 बजे उत्साह से भरी दो बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसके साथ ही विद्यार्थियों के ज्ञानार्जन और रोमांच के सफर का आगाज हुआ। इस यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचारों से रूबरू कराना था।
भ्रमण का पहला पड़ाव झीलों की नगरी उदयपुर का 'प्रताप गौरव केंद्र' रहा, जहाँ विद्यार्थियों ने भारत दर्शन के माध्यम से देश की अद्भुत स्थापत्य कला और नागर शैली के मंदिरों का अवलोकन किया। यहाँ महाराणा प्रताप के अदम्य साहस और वीरता की गाथाओं ने छात्रों में देशभक्ति का संचार किया, वहीं प्राचीन हथियारों और ऐतिहासिक आविष्कारों की तकनीकी बारीकियों ने उनकी जिज्ञासा को शांत किया। इसके पश्चात, भारतीय लोक कला मंडल में कठपुतली प्रदर्शन के माध्यम से भारत के विभिन्न राज्यों की विविध वेशभूषा, खान-पान, रहन-सहन और भाषाओं का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने "विविधता में एकता" के संदेश को जीवंत कर दिया।
ऐतिहासिक ज्ञान की इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए दल हल्दीघाटी पहुँचा, जहाँ संग्रहालय में रखे गए प्राचीन हथियारों, दूरबीन, सूक्ष्मदर्शी यंत्रों और पुरानी तोपों के वैज्ञानिक विश्लेषण ने विद्यार्थियों को अचंभित कर दिया। यहाँ की प्रसिद्ध पीली मिट्टी और युद्ध काल में प्रयुक्त हथियारों की वैज्ञानिक खोज ने उन्हें पुरातत्व विज्ञान के महत्व से अवगत कराया। इसके साथ ही, दल ने मोलेला गाँव का दौरा किया, जहाँ हस्तशिल्प और मूर्तिकला के माध्यम से मिट्टी से निर्मित घरेलू संसाधनों और स्वरोजगार की संभावनाओं को समझा। यात्रा के अंतिम चरण में श्रीनाथजी के दर्शन और 'विश्वास स्वरूपम' की अद्वितीय स्थापत्य कला का अवलोकन किया गया। यहाँ वेक्स म्यूजियम में मोम से बने विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों ने छात्रों को विज्ञान और कला के अद्भुत सामंजस्य का बोध कराया।
इस पूरे भ्रमण का सफल नेतृत्व उपप्राचार्य सुनील कुमार डूंगरवाल, सुनीता रावत, सुनीता शर्मा, मीना राठौर, पंकज गुप्ता, प्रवीण कलवार और अभिषेक गिरी गोस्वामी ने किया। शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने न केवल ऐतिहासिक और वैज्ञानिक तथ्यों को समझा, बल्कि इस भ्रमण ने उनके भीतर शोध और नवाचार की नई प्रेरणा भी जगाई। लौटते समय विद्यार्थियों के चेहरों पर हर्ष और संतोष की झलक साफ दिखाई दे रही थी। छात्रों ने इस सारगर्भित आयोजन के लिए प्रधानाचार्य और विद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक वैज्ञानिक भ्रमणों के आयोजन की आकांक्षा प्रकट की। यह यात्रा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुई।

Pratahkal Bureau
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