अखिल भारतीय साहित्य परिषद निंबाहेड़ा का स्थापना दिवस और काव्य गोष्ठी संपन्न
निंबाहेड़ा में परिषद के स्थापना दिवस और नव वर्ष पर आयोजित विचार गोष्ठी में कवियों ने राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता पर ओजस्वी रचनाओं का पाठ किया।

निंबाहेड़ा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के स्थापना दिवस समारोह के दौरान दीप प्रज्वलन करते मुख्य अतिथि रमेश लक्षकार, अध्यक्ष हजारीलाल मेघवाल व अन्य गणमान्य जन।
निम्बाहेडा। अखिल भारतीय साहित्य परिषद निंबाहेड़ा द्वारा परिषद की स्थापना दिवस एवं नव वर्ष के अवसर पर विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कवि एवं हिंदी के व्याख्याता श्री रमेश लक्षकार "लक्ष्यभेदी", अध्यक्ष सेवानिवृत्ति अधिशासी अभियंता हजारीलाल मेघवाल एवं विशिष्ट अतिथि कवयित्री सुशीला माहेश्वरी रही। कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन कर अतिथियों द्वारा किया गया। इसके पश्चात तृप्ति कुमावत ने परिषद गीत प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत एवं परिचय इकाई अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी ने किया।
राष्ट्रभक्ति और वैचारिक उद्बोधन
मुख्य अतिथि रमेश लक्षकार ने अपने उद्बोधन में कहा कि "भारत में रहकर वंदे मातरम नहीं कहने वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। जो देश हमारा पालन, पोषण, संरक्षण सब कुछ करता है, जिसे हम अपनी मातृभूमि मानते हैं उस भारत माता की जय समस्त भारतीयों को करना चाहिए।" विशिष्ट अतिथि सुशीला माहेश्वरी ने अपनी रचना "महिलाओं का भी हो हक बराबर तो कोई बात बने" प्रस्तुत की। कार्यक्रम के अध्यक्ष पर्यावरण प्रेमी हजारीलाल मेघवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि सभी वक्ताओं की बात से यह सर्व मत है कि हम सब भारत मां को शक्तिशाली और विश्व गुरु के स्थान पर देखना चाहते हैं। इस अवसर पर उन्होंने अपनी कविता "देश हमारा है भारत उसको स्वर्ग बनाना है" प्रस्तुत की।
ओजस्वी काव्य पाठ और राष्ट्र वंदना
इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में कवि प्रहलाद क्रांति ने माँ के चल रहे नवरात्र के अवसर पर राष्ट्र की मातृ शक्तियों के सम्मान में अपनी कविता "महक रहा है शौर्य तुम्हारा, पावन धरा के कण-कण में, सिंहनी बनकर दहाड़ दो फिर, भारत के जण-गण में" पढ़ी। डॉ बालमुकुंद भट्ट सागर ने "मत जंग लगाओ जातिवाद का श्रेष्ठ सनातन की थाती पर, केवल हिंदू बनकर चढ़ जाओ तुम दुश्मन की छाती पर" सुनाया। कवि श्रीपाल सरल ने भारतीय नव वर्ष पर अपनी कविता "हे नववर्ष स्वागत करने को तेरा बदला है अंदाज नया-नया" प्रस्तुत की। पंकज सरकार ने वीर रस का गीत "मिट्टी में मिला देंगे, जहन्नम पहुंचा देंगे, जो बोला था हमने सब करके दिखा देंगे" सुनाकर जोश भर दिया। कवयित्री दीपिका सत्यदीप ने वीर रस का गीत "उन शहीदों को मेरा प्रणाम दोस्तों, लुट गए जो लूटा करके जान दोस्तों" प्रस्तुत की। ### गणमान्य जनों की उपस्थिति और आभार
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ रविंद्र कुमार उपाध्याय ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। विजयलक्ष्मी पटवारी, वंदना प्रजापति, रेखा रानी तिवारी ने भी अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की। धन्यवाद ज्ञापन विभाग संयोजक राजेश गांधी ने किया जबकि कल्याण मंत्र पंकज सरकार द्वारा किया गया। इस अवसर पर शशि कुमार जोशी, घनश्याम तोसावड़ा, बालमुकुंद प्रधान, इंदु बाला चौधरी, किशन लाल माली, विजेंद्र कुमार पानेरी, चांदमल सुथार, जगदीश चंद्र सुथार, उमेश कुमार शर्मा सहित प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन कवयित्री प्रियंका सोमानी ने किया।

Pratahkal Bureau
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