जल संरक्षण पर छात्राओं ने किया जल अंकेक्षण, फिल्म के जरिए बचत का संदेश और नई योजना की जानकारी
निंबाहेड़ा के पैराडाइस सेकेंडरी विद्यालय में जल संरक्षण पर फिल्म दिखाकर छात्राओं को जल अंकेक्षण और नई जलप्रदाय योजना के महत्व से जागरूक किया गया।

तस्वीर में कक्षा के दौरान अधिकारी उपस्थित छात्र-छात्राओं को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए संबोधित कर रहे हैं।
निंबाहेड़ा में राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना के सामुदायिक जागरूकता एवं जन सहभागिता कार्यक्रम के तहत स्कूली छात्राओं को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से पैराडाइस सेकेंडरी विद्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। रूडिप के सहायक अभियंता के निर्देशानुसार आयोजित कार्यक्रम में जल संरक्षण पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन कर छात्राओं को जल अंकेक्षण के महत्व से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में जयपुर कैप टीम से आए अधिकारी एम एंड ई के.के. शर्मा तथा सी एम ई मनोज श्रीवास्तव ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “जल है तो कल है”, लेकिन इसके बावजूद जल का बेवजह दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल संकट का समाधान केवल जल संरक्षण से ही संभव है। उन्होंने बताया कि “जल ही जीवन है” और जल के बिना सुनहरे भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती। जीवन के सभी कार्यों के लिए जल आवश्यक है। प्रकृति द्वारा प्रदत्त इस अमूल्य संसाधन का सम्मान करते हुए इसका व्यर्थ उपयोग रोकना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधों सहित सभी के जीवन में जल की महत्वपूर्ण भूमिका है तथा इसके बिना जीवन असंभव है।
अधिकारियों ने बच्चों को पानी के संरक्षण में उनकी भूमिका तथा नई जलप्रदाय योजना से होने वाले लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई जलप्रदाय योजना के तहत पर्याप्त मात्रा में, पूर्ण प्रेशर के साथ तथा मीटरयुक्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण प्रति व्यक्ति उपलब्ध पेयजल की मात्रा लगातार घट रही है। एक ओर पानी की मांग लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदूषण और मिलावट के कारण उपयोग योग्य जल संसाधनों की गुणवत्ता तेजी से कम हो रही है। यदि आज जल संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पेयजल के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
के.के. शर्मा ने बताया कि पृथ्वी पर उपलब्ध पानी में से केवल एक प्रतिशत पानी ही उपयोग के योग्य है तथा शुद्ध पेयजल के लिए यह मात्रा एक प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने कहा कि यदि अभी से जल संरक्षण के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई गई तो भविष्य में जल संकट और अधिक गहरा सकता है।
इसी क्रम में सामाजिक विकास अधिकारी तनुजा मरेठा ने जल संरक्षण के छोटे-छोटे उपायों की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की 10 छात्राओं ने जल अंकेक्षण करते हुए विद्यालय के पेयजल नलों और शौचालयों में लगे नलों की स्थिति का निरीक्षण किया तथा अपने अनुभव अन्य छात्राओं के साथ साझा किए। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के साथ सोशल आउटरीच टीम की सपना जाट ने भी सहभागिता निभाई।

Pratahkal Bureau
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