निम्बाहेड़ा। चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा ब्लॉक में रेगर समाज प्रतिभा विकास संस्थान के तत्वाधान में आयोजित प्रथम क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ बाड़ी ग्राम में हर्षोल्लास एवं गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस खेल आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व जिला प्रमुख भूपेंद्र सिंह बड़ौली के ओजस्वी विचारों ने न केवल खिलाड़ियों में उत्साह भरा, बल्कि संपूर्ण वातावरण को सामाजिक समरसता की ऊर्जा से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में संयम चपलोत, देवीलाल कुमावत, दिलीप कुमावत, शिव नारायण वैष्णव, कैलाश जाट एवं नाथूलाल कुमावत सहित क्षेत्र के कई गणमान्य जन उपस्थित रहे। आयोजन की सफलता में आयोजक मंडल के सदस्य कैलाश आर्य, प्रकाश शेरसिया, प्रकाश रेगर और विजेश सुकरिया ने सराहनीय भूमिका निभाई।

समारोह के प्रारंभ में बाड़ी सरपंच गोपाल रेगर द्वारा पूर्व जिला प्रमुख भूपेंद्र सिंह बड़ौली का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। इसके पश्चात प्रतियोगिता का उद्घाटन मैच बाड़ी और लसड़ावन की टीमों के बीच खेला गया, जिसका विधिवत टॉस स्वयं बड़ौली ने करवाकर खेल की शुरुआत की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज के युवाओं और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।

अपने प्रभावशाली संबोधन में भूपेंद्र सिंह बड़ौली ने संत शिरोमणि रविदास जी के कालजयी संदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का उल्लेख करते हुए समाज में एकता और भाईचारे की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भक्ति शिरोमणि मीरा बाई को स्मरण करते हुए भावुक स्वर में कहा कि यह उनके लिए अत्यंत गर्व और सम्मान का विषय है कि वे जिस कुल से आते हैं, उसी कुल में मीरा बाई के गुरु संत रविदास जी रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनुष्य का शुद्ध मन और सच्चा चरित्र ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। बड़ौली ने कहा कि उन्हें इस समाज के बीच आकर कभी परायापन महसूस नहीं हुआ, बल्कि एक परिवार जैसा अपनापन मिलता है; नाम अलग हो सकते हैं, परंतु हमारी जड़ें, माटी और संस्कार एक ही हैं।

मेवाड़ की पावन धरा की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने लोकदेवता बाबा रामदेव जी, वीर तेजाजी और गोगा जी की शिक्षाओं को उद्धृत किया, जिन्होंने सदैव समानता का मार्ग दिखाया। अंत में युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि संघर्ष जीवन का अभिन्न हिस्सा है, किंतु निरंतर मेहनत और एकजुटता से ही सफलता के शिखर को छुआ जा सकता है। उन्होंने समाज को विश्वास दिलाया कि वे हर सुख-दुख में सदैव उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।

इस गरिमामयी अवसर पर समाज के वरिष्ठ जन और कार्यकर्ताओं में मोतीलाल रेगर, कारूलाल रेगर, रतन, शिवलाल, राजमल, भोपराज, प्रेमचंद, गोपाल, संयम, नारायण लाल, अनिल, श्याम लाल, विजय, पारस, प्रकाश, राधेश्याम, विजय, रतन, राजू, लालूराम, दीपक, जितेन्द्र, मनोहर, लोकेश, अर्जुन, लाल चंद, नरेंद्र, कन्हैया लाल, गोपाल, दशरथ, छगन, किशन लाल, भंवर लाल, चांदमल, अशोक, विजय, रवि, दिनेश, पवन, उदयलाल, दिनेश, रोशन, संजय, दिलीप एवं प्रवीण सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने इस आयोजन के माध्यम से समाज में नई चेतना और ऊर्जा का संचार किया।

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