निम्बाहेड़ा। आठवें वेतन आयोग का लाभ वर्ष 2016 से पूर्व के पेंशनरों को नहीं देने के केंद्र सरकार के निर्णय के विरोध में राजस्थान पेंशनर समाज, निम्बाहेड़ा के बैनर तले पेंशनरों ने काला दिवस मनाया। इस दौरान बड़ी संख्या में पेंशनरों की उपस्थिति में उपखंड अधिकारी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

वेतन आयोग के भेदभावपूर्ण निर्णय पर जताया रोष

पेंशनरों ने बताया कि "सातवें वेतन आयोग तक कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनरों को भी लाभ मिलता रहा है, लेकिन आठवें वेतन आयोग के मामले में पूर्व पेंशनरों को वंचित करना अन्यायपूर्ण है।" उन्होंने कहा कि पेंशनर अपने 35-40 वर्षों की राजकीय सेवा में सरकार की लोक कल्याणकारी नीतियों को आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। आठवें वेतन आयोग का लाभ वर्ष 2016 से पूर्व के पेंशनरों को नहीं देने के केंद्र सरकार के निर्णय के विरोध में राजस्थान पेंशनर समाज, निम्बाहेड़ा के बैनर तले पेंशनरों ने काला दिवस मनाया।





सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का दिया हवाला

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 1980 में “डी.एस. नकारा एवं अन्य बनाम भारत संघ” मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि "पेंशन कोई अनुदान या सहायता राशि नहीं, बल्कि पेंशनरों का अधिकार है।" इसके बावजूद वर्तमान निर्णय पेंशनरों के अधिकारों के विपरीत है। पेंशनरों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

नेतृत्व और आगामी आंदोलन की रूपरेखा

इस अवसर पर यशवंत राव कदम और मानमल शर्मा के नेतृत्व में पेंशनरों ने उपखंड अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर मांग की कि आठवें वेतन आयोग का लाभ नियमानुसार सभी पेंशनरों को भी प्रदान किया जाए। पेंशनरों ने स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं।

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