निंबाहेड़ा जिला चिकित्सालय में फायर एवं विद्युत सुरक्षा प्रशिक्षण और शपथ कार्यक्रम आयोजित
चिकित्सा कर्मियों को अग्निशमन यंत्रों के उपयोग, पास तकनीक और आपदा प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक किया गया।

राजकीय जिला चिकित्सालय निंबाहेड़ा में फायर सेफ्टी सप्ताह के अंतर्गत शपथ लेते पीएमओ डॉ. राघव सिंह, डॉ. प्रियंका वर्मा, खुषवन्त कुमार एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी।
भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार देशभर में चल रहे फायर सेफ्टी सप्ताह 2026 (04 मई से 10 मई 2026) के अंतर्गत राजकीय जिला चिकित्सालय, निम्बाहेडा में फायर एवं विद्युत सुरक्षा पर व्यापक प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन सीएमएचओ डॉ. ताराचन्द गुप्ता के निर्देश एवं डिप्टी सीएमएचओ डॉ. पुनित कुमार तिवारी के मार्गदर्शन में किया गया।
डिप्टी सीएमएचओ (परिवार कल्याण) डॉ. घनष्याम चांवला ने बताया कि इस वर्ष की थीम “सेफ स्कूल, सेफ हॉस्पिटल एंड फायर सेफ्टी अवेयर सोसायटी - टुगेदर फॉर फायर प्रिवेंशन” है, जिसके तहत स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा मानकों के अनुपालन, आपदा से पूर्व तैयारी एवं त्वरित प्रतिक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. राघव सिंह एवं उनकी टीम द्वारा प्रशिक्षण एवं शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. प्रियंका वर्मा (आरसीएचओ), खुषवन्त कुमार हिण्डोनिया (जिला डाटा प्रबंधक, आईडीएसपी), चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कार्मिकों के साथ बड़ी संख्या में आमजन ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. राघव सिंह ने आग के वैज्ञानिक सिद्धांत फायर ट्रायंगल एवं फायर टेट्राहेड्रन, आग के प्रकार जैसे क्लास ए, बी, सी, इलेक्ट्रिकल एवं किचन फायर तथा विभिन्न अग्निशामक यंत्रों वाटर, फोम, सीओ₂, डीसीपी एवं वेट केमिकल के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। प्रतिभागियों को पास तकनीक (पुल, एम, स्क्वीज, स्वीप) का लाइव डेमो भी दिया गया तथा कूलिंग, स्मदरिंग, स्टार्वेशन एवं केमिकल इनहिबिशन जैसे सिद्धांतों को सरल रूप में समझाया गया।
विद्युत सुरक्षा सत्र में ओवरलोडिंग, शॉर्ट सर्किट, ढीले कनेक्शन जैसे जोखिमों, एसी-डीसी करंट के प्रभाव तथा एमसीबी एवं आरसीसीबी जैसे सुरक्षा उपकरणों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया। विद्युत आग की स्थिति में तत्काल बिजली आपूर्ति बंद करने पर विशेष जोर दिया गया।
अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में ऑक्सीजन युक्त क्षेत्रों की सुरक्षा, आईसीयू में हॉरिजॉन्टल इवैक्यूएशन तथा मरीजों की प्राथमिकता के साथ सुरक्षित निकासी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। एलपीजी गैस रिसाव की स्थिति में स्विच ऑन/ऑफ न करने एवं उचित वेंटिलेशन बनाए रखने जैसी सावधानियों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।
डॉ. घनष्याम चांवला ने फायर सेफ्टी असेसमेंट चेकलिस्ट के आधार पर सभी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित सुरक्षा आकलन के निर्देश दिए। इसमें फायर सर्टिफिकेट, भवन संरचना, निकासी मार्ग, अलार्म सिस्टम, फायर फाइटिंग उपकरण, विद्युत सुरक्षा, मेडिकल गैस प्रबंधन, मॉक ड्रिल एवं आपदा प्रबंधन योजना जैसे बिंदु शामिल हैं।
सीएमएचओ डॉ. ताराचन्द गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशानुसार सभी संस्थानों को सुरक्षा मूल्यांकन कर रिपोर्ट आईएचआईपी पोर्टल पर प्रस्तुत करनी होगी। उन्होंने कहा कि फायर सेफ्टी सप्ताह के दौरान जिले में व्यापक जागरूकता गतिविधियाँ, प्रशिक्षण एवं निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि “सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है; तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव है।”

Pratahkal Bureau
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