सूफी-संतों की सरज़मीं निम्बाहेड़ा में हज़रत केली वाले बाबा रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स मुबारक अकीदत, एहतराम और रूहानियत के चरम वैभव के साथ गुरुवार को संपन्न हो गया। समूचे क्षेत्र में इस धार्मिक आयोजन को लेकर ज़बरदस्त उत्साह देखा गया, जहां अंतिम दिन दरगाह शरीफ़ पर कुल की रस्म, फ़ातिहा ख़्वानी, चादर शरीफ़ पेश करने और सामूहिक दुआओं के दौर ने जायरीन को भावविभोर कर दिया। आस्था के इस महाकुंभ में स्थानीय क्षेत्र सहित दूर-दराज के अंचलों से आए हज़ारों अकीदतमंदों ने पलक-पावड़े बिछाकर शिरकत की और बारगाह-ए-इलाही में अपनी हाज़िरी दर्ज कराई।

इस गरिमामयी और रूहानी समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शहर काज़ी हाजी मोहम्मद आबिद हुसैन साहब उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता निम्बाहेड़ा मुस्लिम वक्फ कमेटी के सदर सलीम चाचा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व पार्षद खालिद खान ने शिरकत की। इसके साथ ही ऑल इंडिया हज कमेटी के सदस्य हाजी अब्दुल्लाह खान, देश के मशहूर व मारूफ़ शायर वसीम इरफानी, हज खिदमत कमेटी के अध्यक्ष अख्तर पटेल, रशीद खान एवं राजा मेवाफरोश (उस्ताद) ने सरपरस्त के रूप में अपनी गौरवमयी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया।

धार्मिक मर्यादा और परंपराओं के अनुसार कार्यक्रम के शुभारंभ में कुल की रस्म में शरीक होने पहुंचे सभी अतिथियों, उलेमाओं और गणमान्य मेहमानों का उर्स कमेटी द्वारा साफा बंधवाकर एवं पुष्पमालाएं पहनाकर आत्मीय स्वागत व अभिनंदन किया गया। इसके पश्चात मुख्य अतिथियों और सरपरस्तों ने आस्ताने पर मखमली चादर शरीफ़ और अकीदत के फूल पेश किए। इस दौरान मुल्क में अमन-चैन, कौमी एकता, भाईचारे, चहुंमुखी तरक्की और खुशहाली के लिए विशेष सामूहिक दुआ मांगी गई, जिससे पूरा परिसर 'आमीन' की गूंज से सराबोर हो गया।

इस रूहानी जलसे को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सूफी संतों की पवित्र शिक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि औलिया-ए-किराम की तालीमात बुनियादी तौर पर इंसानियत, बेपायन मोहब्बत, आपसी भाईचारे, सहिष्णुता और खिदमत-ए-खल्क़ (मानव सेवा) का अमर पैगाम देती हैं। वर्तमान दौर में ऐसे पवित्र और कौमी मजमे समाज में आपसी सद्भाव, समरसता और एकता की जड़ों को और अधिक सुदृढ़ करने का ऐतिहासिक कार्य करते हैं।

इस ऐतिहासिक उर्स के सफल आयोजन में कई गणमान्य अतिथियों ने उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें सलीम पठान, नासिर खान, हाजी कालू बा, बाग वाली मस्जिद के इमाम ज़ीशान साहब, संपादक रियाज खान, मुस्ताक भाई पत्रकार (नीमच), कालू बाबा (छोटी सादड़ी), अनीस शेख़, शकील गोरी, अज़ीज़ बाबा, जलील बाबा, इमरान बाबा, ज़ाहिद बाबा जावरा एवं शेरू बाबा (सनवाड़ शरीफ़) शामिल रहे। आधिकारिक और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं के तहत हज खिदमत कमेटी के सदर मतलूब अजमेरी, रोशन अली बाबा साहब, उर्स कमेटी के सदर सादिक हुसैन, कैशियर अयाज खान एवं नायब सदर जाकिर खान ने भी विशेष रूप से ज़िम्मेदारियां संभालीं।

संपूर्ण उर्स के दौरान चाक-चौबंद व्यवस्थाओं और सफल संचालन का जिम्मा केली वाले बाबा उर्स कमेटी के सदर हाजी अमीन खान जागीरदार, सचिव इमरान खान, जॉइंट कैशियर नासिर हुसैन मंसूरी, नायब सदर जमील खान उर्फ भाया भाई एवं हुसैन खान के सशक्त नेतृत्व में बखूबी अंजाम दिया गया। समारोह को सुव्यवस्थित बनाने में कमेटी सदस्य शराफत मेवाफरोश, मोहसिन खान, इरफान खान, शफी मेवाफरोश, सद्दाम खान, हैदर मेव, असलम नियारगर, गुलजार खान, एहसान, रेहान खान, यासीन खान, वसीम उर्फ पोता, लियाकत मेवाफरोश, दरगाह खादिम साबिर रहमानी, रईस खान, शाहिद खान (प्रतापगढ़), वहीद खान एवं शादाब खान सहित बड़ी संख्या में सक्रिय समाजजनों और अकीदतमंदों ने अहम् भूमिका निभाई।

दरगाह शरीफ़ पर कुल की रस्म और सामूहिक दुआओं के साथ इस अज़ीमुश्शान उर्स मुबारक का गरिमापूर्ण समापन हुआ। देर रात तक दरगाह परिसर इबादत, ज़िक्र, रूहानी कव्वालियों और ज़ायरीनों की दुआओं से गूंजता रहा। अंत में सभी श्रद्धालु देश में अमन-ओ-अमान, भाईचारे और मानव कल्याण की मन्नतें लेकर और औलिया-ए-किराम की बरकतों का रूहानी सौगात समेटकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए।

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