निम्बाहेड़ा: श्री गोपाल कृष्ण गौशाला में धनवंतरी वाटिका का रोपण
विश्व पर्यावरण दिवस पर अनोपपुरा गौशाला में औषधीय पौधों का रोपण किया गया, साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए महाआरती और यज्ञ का आयोजन संपन्न हुआ।

विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में अनोपपुरा स्थित श्री गोपाल कृष्ण गौशाला में महंत लालनाथ योगी और उपस्थित सदस्यों द्वारा औषधीय पौधों का रोपण किया गया।
विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर कनेरा घाटा क्षेत्र स्थित श्री गोपाल कृष्ण गौशाला, अनोपपुरा में प्रकृति संरक्षण के संकल्प के साथ 'धनवंतरी वाटिका' का भव्य रोपण किया गया। इस पुनीत आयोजन में औषधीय महत्व के दुर्लभ पौधों का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रोपण कर पर्यावरण संवर्धन का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पर्यावरण गतिविधि के प्रांत सहसंयोजक धर्मपाल गोयल ने कहा कि दिव्य औषधीय पौधों का रोपण न केवल प्रकृति का श्रृंगार है, अपितु यह समाज के लिए सर्वविध वैभव और संपन्नता का मार्ग प्रशस्त करता है। इस अवसर पर हरड़, गरुड़, आल स्पाइस, सीता अशोक, शिकाकाई, कपूर और लसोड़ा जैसे अत्यंत उपयोगी एवं दुर्लभ औषधीय पौधों को रोपित किया गया। आसन दरियानाथ पीठ के महंत लालनाथ योगी ने पर्यावरण संरक्षण की अनिवार्यता पर बल देते हुए औषधीय वनस्पतियों के औषधीय गुणों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। गौशाला अध्यक्ष पुष्कर शर्मा ने संस्थान में निरंतर संचालित पौधारोपण, वाटिका निर्माण और अन्य सेवा प्रकल्पों का विवरण प्रस्तुत किया।
आयोजन की आध्यात्मिक श्रृंखला में गायत्री परिवार के भेरूलाल बगड़ द्वारा पंच महाभूत यज्ञ संपन्न कराया गया, जबकि धार्मिक कार्य संयोजक जितेंद्र त्रिपाठी ने जीव-जंतुओं के लिए परिंडे वितरित किए। कार्यक्रम के दौरान गौ माता एवं गंगा माता का पूजन कर महाआरती की गई। इस गरिमामयी अवसर पर छगनलाल धाकड़ ने 'सोना री चिड़कली रे प्यारो मारो देश...' गीत के माध्यम से भारत माता की गौरवशाली परंपरा का ओजस्वी वर्णन किया। साथ ही, गौशाला के समर्पित गोपालकों को सम्मानित भी किया गया।
इस आयोजन में गौशाला संरक्षक प्यारचंद धाकड़, कृष्णपाल सिंह, सचिव गीतालाल पचोरिया, बंसीलाल धंधोंलिया, हीरालाल गाजी, रामेश्वरलाल पचोरिया, गोपाल पचोरिया, गोवर्धन धंधोंलिया, मोहनलाल मेट, शंकरलाल जटिया, दिनेश, मांगीलाल, गोविंद, सुखलाल, गंगाराम, जुझार और कालू भील सहित अनेक कार्यकर्ता एवं गोपालक उपस्थित रहे। प्रकृति और संस्कृति के समन्वय का यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता का एक सशक्त उदाहरण बनकर संपन्न हुआ।

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