निम्बाहेडा: सभी धर्म शास्त्रों का सार है गौ सेवा, अनोपपुरा गौशाला में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
निम्बाहेडा के अनोपपुरा स्थित श्री गोपाल कृष्ण गौशाला में मौनी अमावस्या पर भव्य धर्म सभा का आयोजन हुआ। वृंदावन के संत सत्यानंद सरस्वती ने गौ सेवा को समस्त शास्त्रों का सार बताया। उदयपुर संभाग की इस विशाल गौशाला में सुंदरकांड पाठ, महाप्रसाद और गोतीर्थ निर्माण के संकल्प के साथ सैकड़ों भक्तों ने हिस्सा लिया। जानिए इस आयोजन की पूरी रिपोर्ट और गौ संरक्षण की नई योजनाओं के बारे में।

निम्बाहेडा। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल और संत श्री शूकदेव मुनि की तपोभूमि श्री सुखानंद महादेव के सानिध्य में स्थित श्री गोपाल कृष्ण गौशाला एवं कल्पवृक्ष धाम, अनोपपुरा में मौनी अमावस्या का पर्व भक्ति और संकल्प के एक अभूतपूर्व संगम के रूप में मनाया गया। इस पावन अवसर पर आयोजित धर्म सभा और सुंदरकांड पाठ ने न केवल क्षेत्र के वातावरण को भक्तिमय कर दिया, बल्कि गौ संरक्षण के प्रति एक नई अलख भी जगाई। कार्यक्रम का शुभारंभ दोपहर दो बजे सुंदरकांड पाठ मित्र मंडल द्वारा किया गया, जिसका नेतृत्व विश्व हिंदू परिषद के प्रखंड अध्यक्ष सतीशचंद्र राठी, मंत्री भोलीराम धाकड़ और सहमंत्री चंद्रशेखर व्यास ने किया। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की चौपाइयों की गूँज के बीच समूचा गौशाला परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
गौशाला के सचिव गीतालाल पचोरिया और सह सचिव रामनारायण बीर के अनुसार, पाठ के पश्चात आयोजित धर्म सभा में संतों के उद्बोधन ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। सुखानंद के महंत हरिदास जी ने दोहा और चौपाइयों के माध्यम से गौ माता की महिमा का वर्णन करते हुए उन्हें संस्कृति का आधार बताया। वहीं, वृंदावन से पधारे संत श्री सत्यानंद सरस्वती ने अपने प्रभावी उद्बोधन में स्पष्ट किया कि दुनिया के समस्त धर्म शास्त्रों और अवतारों की गाथाओं का अंतिम सार गौ सेवा ही है। उन्होंने बल देकर कहा कि संसार में गौ सेवा से बड़ी कोई दूसरी सेवा नहीं है और यही वह मार्ग है जो मनुष्य को आत्मिक शांति और मोक्ष की ओर ले जाता है।
गौशाला की भविष्यगामी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए अध्यक्ष पुष्कर कुमार शर्मा ने बताया कि भौगोलिक दृष्टि से यह उदयपुर संभाग की सबसे विशाल गौशाला है, जो लगभग एक हजार बीघा चरागाह भूमि पर विस्तृत है। संख्यात्मक और गुणात्मक दोनों ही दृष्टिकोणों से यह जिले की अग्रणी गौशालाओं में शुमार है। उन्होंने घोषणा की कि यहाँ जल्द ही 'गोतीर्थ' की स्थापना की जाएगी और वैज्ञानिक पद्धति से नस्ल सुधार के कार्यों को गति दी जाएगी। सेवा के इस महाकुंभ में किशनलाल गाजी बडावली द्वारा गौवंश को गुड़ खिलाया गया और गोपालकों को वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। सुंदरकांड मंडल ने पांच बोरी बांटा (पशु आहार) और रतनलाल चारण ने केले का प्रसाद अर्पित कर गौ सेवा के संकल्प को मूर्तरूप दिया।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजित भव्य महाआरती में जनभावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। इस गरिमामय अवसर पर गौशाला के संरक्षक एवं पूर्व उपप्रधान प्यारचंद धाकड़, उपाध्यक्ष सतीशचंद्र राठी, कोषाध्यक्ष राजेश बीर, सह कोषाध्यक्ष आकाश मेश, सदस्य हीरालाल गाजी, बंशीलाल धंधोंलिया, चंद्रशेखर व्यास, कैलाश लूणखंदा, मोहन मेंट, मोहनलाल गाजी, गोपाल, निर्भयराम पचोरिया, राधेश्याम शर्मा, दुष्यंत शर्मा, कैलाश गिरी, भेरूलाल बामतीया, ओमप्रकाश सुथार, नंदलाल धाकड़, मोहनलाल सुथार, हरिशंकर जोशी, नवीन शर्मा, विजेंद्र सुथार, भाजपा मंडल अध्यक्ष जुगल किशोर धाकड़, उपाध्यक्ष शिवलाल धाकड़, जगदीश मेष, मदन गोपाल धाकड़, मुकेश बगड़, दिलीप नायमा, गोरधन धंधोंलिया और सत्यनारायण शर्मा चरलिया सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। महाप्रसाद के वितरण के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन समाज में गौ संरक्षण के प्रति एक गहरी चेतना छोड़ने में सफल रहा।

Pratahkal Bureau
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