निम्बाहेडा। स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की संकल्पना को साकार करते हुए बिनोता कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य शिविर ने क्षेत्र में नई चेतना का संचार किया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस ब्लॉक स्तरीय शिविर में खंड के अंतर्गत आने वाले विभिन्न विद्यालयों के सैंकड़ों बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस आयोजन ने न केवल बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के प्रति जागरूकता पैदा की, बल्कि चिकित्सालय की बुनियादी समस्याओं को भी जनप्रतिनिधियों के समक्ष लाकर खड़ा कर दिया है।

शिविर का मुख्य आकर्षण विशेषज्ञों का वह दल रहा जिसने सुबह से ही बच्चों के स्वास्थ्य की गहन जांच शुरू कर दी थी। शिशुरोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रशांत पाटीदार, चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर दिनेश मेघवाल, दंत चिकित्सक श्वेता गिरिया, नेत्र सहायक शिवराम निगम और डॉक्टर दुर्गेश कुमावत के नेतृत्व में पूरी टीम ने पूरी तन्मयता से अपनी सेवाएं दीं। शिविर के दौरान कुल 165 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें से दो बच्चों की स्थिति को गंभीर देखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किया गया।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जिला भाजपा मंत्री शौकीन चपलोत, निम्बाहेडा भाजपा पश्चिम मंडल के गोपाल तिवारी, जनपद प्रकाश अन्यावदा और अनिल भारद्वाज ने शिविर का अवलोकन किया और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। शिविर को सफल बनाने में कृष्णवीर सिंह, रमेश राइवल, मोइनुद्दीन, सीएचओ शांति लाल अहीर, चंद्रकांत मेनारिया, नूतन वैरागी, प्रेम जटिया, सीमा जाट, आसमा बानो, अफसाना और आसिफ मंसूरी जैसे समर्पित स्वास्थ्य कर्मियों ने अपना महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

हालांकि, सेवा के इस महायज्ञ के बीच एक बड़ी चुनौती भी सामने आई। चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर दिनेश मेघवाल ने जिला मंत्री शौकीन चपलोत का ध्यान चिकित्सालय की एक गंभीर समस्या की ओर आकृष्ट किया। उन्होंने बताया कि चिकित्सालय में वर्तमान में डिजी सेट (बड़ा जनरेटर) उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण बिजली कटौती के दौरान मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से सुबह के समय बिजली विभाग द्वारा की जाने वाली दो से ढाई घंटे की कटौती के चलते जांच और उपचार का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और मरीजों को समय पर रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। इस पर चर्चा करते हुए चिकित्सालय में शीघ्र ही एक बड़ा जनरेटर सेट उपलब्ध कराने की मांग की गई ताकि निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।

यह शिविर केवल उपचार का माध्यम नहीं रहा, बल्कि इसने क्षेत्र के बच्चों के स्वास्थ्य अधिकार और सरकारी अस्पतालों की बुनियादी जरूरतों के बीच के सेतु का काम किया है।

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