जैन दिवाकर भवन में आयोजित धर्मसभा में उपाध्याय डॉ. श्री गौतममुनि जी महाराज ने युवाओं के चरित्र निर्माण और सामाजिक नैतिकता पर विशेष मार्गदर्शन दिया।

आदर्श कॉलोनी स्थित जैन दिवाकर भवन में आध्यात्मिक चेतना का एक अनुपम दृश्य उस समय देखने को मिला, जब जैन दिवाकरीय दक्षिण भूषण, जैन मार्तण्ड, श्रमण संघीय उपाध्याय पूज्य गुरुदेव डॉ. श्री गौतममुनि जी महाराज एवं आगम ज्ञाता, मेवाड़ रत्न श्री वैभवमुनि जी महाराज के पावन सान्निध्य में विशेष धर्मसभा का आयोजन हुआ। इस अत्यंत गरिमामयी और श्रद्धापूर्ण अवसर पर श्री जैन दिवाकर कमल गौशाला के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक अशोक नवलखा ने विशेष रूप से उपस्थित होकर गुरुदेवों के मुखारविंद से मांगलिक श्रवण किया और उनका मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस आध्यात्मिक मिलन ने समूचे क्षेत्र के श्रद्धालुओं को गहरे आत्मिक आनंद और वैचारिक दिव्यता से सराबोर कर दिया।

पूर्व विधायक अशोक नवलखा ने इस पावन प्रसंग पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि पूज्य गुरुदेवों के श्रीमुख से निसृत हुए प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक विचारों ने वहाँ उपस्थित समस्त जनसमुदाय को जीवन में एक नई सकारात्मक दिशा और ऊर्जा प्रदान की है। धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य गुरुदेव ने धर्म, अध्यात्म, शिक्षा, संस्कार, सदाचार एवं आत्मचिंतन के गहन महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अत्यंत गंभीर शब्दों में इस बात को रेखांकित किया कि मानवीय मूल्यों का संरक्षण और संवर्धन ही किसी भी सभ्य समाज की वास्तविक उन्नति और प्रगति का मूल आधार है।

इस आध्यात्मिक प्रवास के दौरान अशोक नवलखा ने पूज्य गुरुदेवों के समक्ष उपस्थित होकर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं समसामयिक विषयों पर अत्यंत सारगर्भित, नीतिपरक और विस्तृत चर्चा भी की। इस विमर्श के दौरान पूज्य उपाध्याय श्री ने वर्तमान समय में समाज में निरंतर बढ़ती नैतिकता की आवश्यकता, पारिवारिक संस्कारों की महत्ता तथा विशेष रूप से युवाओं में चरित्र निर्माण की महती आवश्यकता पर अपना विशेष एवं दूरदर्शी मार्गदर्शन प्रदान किया। नवलखा ने संतों की महिमा का गुणगान करते हुए दृढ़तापूर्वक कहा कि राष्ट्रसंतों का ऐसा पावन सान्निध्य ही व्यक्ति को आंतरिक और आत्मिक शांति प्रदान करता है, उसमें सकारात्मक चिंतन का संचार करता है तथा मानव जीवन को वास्तविक रूप से सार्थक बनाने की परम प्रेरणा देता है।

इस अलौकिक अवसर पर उपस्थित विशाल श्रद्धालु समुदाय ने गुरुदेवों के इन अमूल्य आशीर्वचनों को परम जीवनोपयोगी और अनुकरणीय बताते हुए इसे अपने आत्मिक उन्नयन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ अवसर माना। सभा में उपस्थित सभी श्रावकों और श्रद्धालुओं ने एक स्वर में धर्म आराधना, सदाचार, सदाचारी जीवन शैली एवं निःस्वार्थ मानव सेवा के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया। गुरुदेवों के प्रति अपनी अगाध और अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हुए श्रावक समाज ने यह मंगल भावना भाई कि संतों के इस अलौकिक ज्ञानामृत एवं दिव्य आशीर्वाद से संपूर्ण मानव समाज में आपसी सद्भाव, उच्च संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार निरंतर और अनवरत रूप से होता रहे।

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