निंबाहेड़ा: ग्रामीण सशक्तिकरण का नया अध्याय, डॉ. मंजू बाघमार ने 'वी.बी.-जीरामजी' कानून से खोला 125 दिन के रोज़गार का द्वार
निंबाहेड़ा के ढोरिया में आयोजित रात्रि चौपाल में प्रभारी मंत्री डॉ. मंजू बाघमार ने 'वी.बी.-जीरामजी' अधिनियम 2025 की घोषणा करते हुए ग्रामीण परिवारों को 125 दिन के रोज़गार की गारंटी दी। विधायक श्रीचंद कृपलानी की मौजूदगी में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान हुआ और विकास कार्यों की सौगातें दी गईं।

निंबाहेड़ा। नए भारत की संकल्पना अब धरातल पर उतर रही है, जहाँ तकनीक और पारदर्शिता के संगम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी जा रही है। चित्तौड़गढ़ जिले की प्रभारी मंत्री डॉ. मंजू बाघमार और पूर्व यूडीएच मंत्री व विधायक श्रीचंद कृपलानी ने सोमवार को निंबाहेड़ा उपखंड की ग्राम पंचायत ढोरिया में आयोजित 'रात्रि चौपाल' के माध्यम से न केवल ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया, बल्कि 'विकसित भारत–रोज़गार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025' (वी.बी.-जीरामजी) के रूप में एक युगांतरकारी कानून की रूपरेखा भी साझा की। यह चौपाल केवल जनसुनवाई का माध्यम नहीं बनी, बल्कि भविष्य के समृद्ध ग्रामीण भारत की नींव रखती नज़र आई।
कार्यक्रम का शुभारंभ भावुक और उत्साहजनक क्षणों के साथ हुआ, जब प्रभारी मंत्री ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना की दूसरी किस्त के चेक और उज्ज्वला योजना के पात्र लाभार्थियों को गैस कनेक्शन वितरित किए। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। ढोरिया के ग्रामीणों की लंबे समय से लंबित मांग को स्वीकार करते हुए डॉ. बाघमार ने विधायक कृपलानी की अनुशंसा पर डीएमएफटी मद से आंगनवाड़ी भवन के निर्माण के निर्देश दिए और पशु चिकित्सालय के लिए तत्काल बजट प्रस्ताव तैयार करने की घोषणा की, जिससे क्षेत्र में हर्ष की लहर दौड़ गई।
रात्रि चौपाल का मुख्य आकर्षण वी.बी.-जीरामजी अधिनियम की विस्तृत जानकारी रही। डॉ. मंजू बाघमार ने इस कानून को ग्रामीण सशक्तिकरण का आधुनिक प्रतीक बताते हुए कहा कि जहाँ मनरेगा एक दौर की आवश्यकता थी, वहीं वी.बी.-जीरामजी अब पूरी तरह पारदर्शी, बायोमेट्रिक आधारित और जवाबदेह व्यवस्था है। इस कानून के तहत अब हर ग्रामीण परिवार को वर्ष में न्यूनतम 125 दिन का रोज़गार सुनिश्चित किया गया है, जो पूर्व की व्यवस्था से 25 प्रतिशत अधिक है। कानून की संवेदनशीलता इस बात से समझी जा सकती है कि फसल बुवाई और कटाई के समय राज्यों को 60 दिन का विराम देने की शक्ति दी गई है ताकि कृषि कार्य बाधित न हों। साथ ही, भुगतान में विलंब होने पर मुआवज़ा और समय पर कार्य न मिलने पर 15 दिन बाद बेरोज़गारी भत्ता देना अनिवार्य कर दिया गया है।
विधायक श्रीचंद कृपलानी ने अपने संबोधन में इस अधिनियम को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि निंबाहेड़ा-मंगलवाड़ फोरलेन का निर्माण और कनेरा में गर्ल्स कॉलेज की स्थापना जैसे निर्णय क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर बदल देंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचाना ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में शासन और प्रशासन का सामंजस्य स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। चौपाल में जिला कलक्टर आलोक रंजन, जिला परिषद सीईओ विनय पाठक, उपखंड अधिकारी विकास पंचोली, पूर्व विधायक अशोक नवलखा, निवर्तमान जिला प्रमुख गब्बर सिंह अहीर और पूर्वी मंडल अध्यक्ष अशोक जाट सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। साथ ही पश्चिम मंडल अध्यक्ष राजेंद्र सिंह शक्तावत, नगर मंडल अध्यक्ष कपिल चौधरी, जिला प्रवक्ता मानवेंद्र सिंह चौहान, पूर्व सरपंच फलवा शंभुलाल जाट, पूर्व पंचायत समिति सदस्य मुन्नालाल धाकड़, पूर्व सरपंच शिवनारायण धाकड़, लसडावन सरपंच रमेश बोरीवाल, जावदा सरपंच प्रतिनिधि अमर सिंह रावत, मंडला चारण सरपंच प्रतिनिधि गणेशदान चारण, जीएसएस अध्यक्ष शांतिलाल मेनारिया, मंडल उपाध्यक्ष प्रहलाद प्रजापत, पूर्व महामंत्री राजेश जैन, विशाल आमेटा, शिवलाल चौधरी, अरविंद सिंह, आईदान चारण, पुष्कर धाकड़, रामपाल मेघवाल, जितेंद्र सिंह, पुलिस उप अधीक्षक बद्रीलाल राव, पंस विकास अधिकारी लक्ष्मण लाल खटीक और तहसीलदार घनश्याम जरवार ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। 41 से अधिक प्राप्त परिवादों में से अधिकांश का मौके पर निस्तारण इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान सरकार जन-सुनवाई और जन-कल्याण के प्रति पूरी तरह समर्पित है।

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