निम्बाहेड़ा के कमधज नगर में भीषण आगजनी के बाद जर्जर हुए कावरा टेंट हाउस गोदाम पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। नगर परिषद ने भवन को असुरक्षित घोषित कर मालिक को तीन दिन का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। जानें क्या है प्रशासन का अगला सख्त कदम।

निम्बाहेड़ा के कमधज नगर में हाल ही में घटी भीषण आगजनी की घटना ने अब एक कानूनी मोड़ ले लिया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद कावरा टेंट हाउस का गोदाम न केवल राख का ढेर बनकर रह गया है, बल्कि अब यह भवन आसपास के रहवासियों के लिए एक संभावित खतरे का सबब भी बन गया है। जनसुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए, नगर परिषद निम्बाहेड़ा ने एक सख्त कदम उठाते हुए भवन स्वामी सुरेश चंद्र कावरा को नोटिस जारी किया है, जिसमें भवन को तत्काल सुरक्षित करने अथवा उसे ध्वस्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

नगर परिषद आयुक्त कौशल कुमार खटूमरा द्वारा राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 243 के अंतर्गत जारी इस आदेश की पृष्ठभूमि में जिला मजिस्ट्रेट, चित्तौड़गढ़ के निर्देश और घटना के बाद गठित जांच समिति की रिपोर्ट शामिल है। 15 जून 2026 को हुई अग्निकांड के बाद मौके का मुआयना करने पर यह स्पष्ट हुआ कि आग की भीषण लपटों ने भवन की संरचनात्मक मजबूती को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में यह ढांचा इतना कमजोर हो चुका है कि यह किसी भी समय धराशायी हो सकता है, जो आसपास के आवासीय इलाके में रहने वाले लोगों और राहगीरों के जीवन के लिए बड़ा जोखिम है।

प्रशासन ने भवन स्वामी को निर्देशित किया है कि वे तीन दिनों के भीतर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर उसे पूर्ण करें। साथ ही, सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भवन के चारों ओर तत्काल प्रभाव से बैरिकेडिंग और फेंसिंग करने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। नगर परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर इन निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है, तो निकाय स्वयं ध्वस्तीकरण की कार्यवाही करेगा, जिसका समस्त व्यय भवन स्वामी को ही वहन करना होगा। इसके अतिरिक्त, यदि इस जर्जर भवन के कारण कोई अप्रिय घटना या जनहानि होती है, तो उसके लिए भी भवन स्वामी को ही उत्तरदायी माना जाएगा। स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे एहतियात के तौर पर इस क्षेत्र से गुजरते समय विशेष सावधानी बरतें। यह घटना न केवल शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि आपदा के बाद असुरक्षित ढांचों के प्रति प्रशासन की कठोर नीति को भी रेखांकित करती है।

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