निकुंभ में बोले निश्चल मुनि: अहंकार छोड़कर ही संभव है आत्म दर्शन
चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला के दौरान मुनि श्री निश्चल ने श्रावकों को पंचेन्द्रिय संयम, पाप निवृत्ति और आत्मानुभूति का महत्व समझाया।

तस्वीर में निकुंभ के समता भवन में उपस्थित लोग एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
निकुंभ कस्बे के समता भवन में चातुर्मास के निमित्त विगत दो माह से चल रही प्रवचन श्रृंखला के दौरान शासन दीपक निश्चल मुनि मसा ने श्रावकों को संबोधित करते हुए कहा कि संसार में सच्चा गुरु वही होता है, जो मानव की अपनी कमियां और अज्ञान को गुरु दक्षिणा के रूप में मांगकर आत्मा के अंधकार को दूर करने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु की वाणी प्राप्त होने पर आत्म दर्शन का मार्ग खुलता है, लेकिन पुरुषार्थ के बगैर आत्म दर्शन असंभव है।
जैन दर्शन में वर्णित विद्वान संत केशी श्रमण एवं राजा परदेशी का उदाहरण देते हुए मुनि श्री ने बताया कि आत्मा को समय-समय पर जगाने के लिए मानव को अपने अहंकार की तिलांजलि देनी पड़ती है। जो व्यक्ति आत्म तत्व के बोध को समझ जाता है, वही अपने जीवन की भावी मोक्ष रूपी मंजिल को प्राप्त कर सकता है। मंजिल को प्राप्त करने के लिए उसके मार्ग का ज्ञान होना अति आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि मानव द्वारा पंच इंद्रियों से प्राप्त ज्ञान परोक्ष ज्ञान होता है। मनुष्य की पंचेन्द्रियां ज्ञान प्राप्त करने का साधन हैं। इनका दुरुपयोग करने पर परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहना पड़ता है। आत्मा रूपी नदी में आत्म संयम के पानी से मानव जीवन के पाप धोए तो नहीं जा सकते, परंतु पाप से निवृत्ति का मार्ग जरूर प्राप्त किया जा सकता है।
मुनि श्री ने कहा कि जीवों के प्रति निर्दयता और क्रुरता के व्यवहार से मानव पाप का भागी बनता है। यही पाप उसके जीवन में दुखों का कारण भी बनता है। उन्होंने पाप से दूर रहकर आत्मानुभूति के माध्यम से प्रायश्चित के मार्ग को अपनाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत ओसरा लाभार्थी अशोक कुमार बबलू कुमार मेहता ने किया। प्रतिक्रमण एवं संवर के बारे में जानकारी मंत्री सुरेश सहलोत ने दी। श्री राम सत्संग सेवा परिषद के अध्यक्ष प्रेम सिंह सिसोदिया ने सनातन श्रावकों से मुनि श्री के नियमित प्रवचन का लाभ लेने के लिए समय पर समता भवन पहुंचने का आग्रह किया।
सनातन श्रावक रामेश्वर दशोरा ने अपने पूजन को भगवान बना मन मंदिर भजन की प्रस्तुति दी। आभार जैन संघ अध्यक्ष महावीर कुमार मेहता ने जताया। समता भवन में चल रही प्रवचन श्रृंखला में गुरु वाणी के माध्यम से आत्म दर्शन, आत्म संयम, पाप से निवृत्ति और प्रायश्चित के मार्ग पर श्रावकों को मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

Pradeep Vaishnav, Chittorgarh
नाम: प्रदीप वैष्णव
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: बड़ी सादड़ी तहसील
अनुभव: 26 साल (सन 2000 से 'प्रातःकाल' के साथ कार्यरत)
परिचय
प्रदीप वैष्णव बड़ी सादड़ी तहसील क्षेत्र के एक अनुभवी पत्रकार हैं। वह स्थानीय समाचारों, सामाजिक गतिविधियों, शिक्षा और क्राइम रिपोर्टिंग के क्षेत्रों में मुख्य रूप से सक्रिय हैं। वह सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रखते हैं। तथ्यात्मक और सरल रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देना तथा जनहित से संबंधित विषयों को निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है।
बीट और विशेषज्ञता
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शैक्षणिक योग्यता (Education)
B.A. जर्नलिज्म (पत्रकारिता में स्नातक)
