भारत-केंद्रित शिक्षा से जागेगा राष्ट्रीय स्वाभिमान, विश्वगुरु बनेगा भारत: गोविंद कुमार
चित्तौड़गढ़ में विद्या भारती के प्रशिक्षण वर्ग के समापन पर संघ पदाधिकारी ने भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा और राष्ट्र निर्माण पर बल दिया।

चित्तौड़गढ़ के प्रशिक्षण केंद्र में विद्या भारती कार्यक्रम के दौरान मंच पर समूह में बैठे और खड़े प्रतिभागी दिख रहे हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारतीय शिक्षा व्यवस्था में भारत-बोध और भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः प्रतिष्ठित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। विद्यालयों की शिक्षण प्रक्रिया में भारतीय ज्ञान परंपरा और मूल्यों को शामिल करने से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय स्वाभिमान की भावना जागृत होगी। यह बात विद्या भारती के क्षेत्र संगठन मंत्री गोविंद कुमार ने चित्तौड़ प्रांत प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित सप्त दिवसीय प्रशिक्षु प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के समापन सत्र में कही।
गोविंद कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारतीय शिक्षा में भारत-बोध और भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः स्थापित करने का अवसर मिला है। इसके फलस्वरूप विश्वगुरु भारत अपनी गौरवशाली प्रतिष्ठा की ओर अग्रसर है। उन्होंने आवश्यकता जताई कि भारतीय ज्ञान परंपरा को विद्यालयों की दैनिक शिक्षण प्रक्रिया और पाठ-योजना का अभिन्न अंग बनाया जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल्यों की शिक्षा ही वास्तविक जीवन-मूल्यों की शिक्षा है। भारत-केंद्रित शिक्षा से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय स्वाभिमान जागृत होगा और भारत पुनः विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित होगा।
प्रशिक्षण केंद्र संयोजक महेंद्र सिंह सिसोदिया एवं प्रांत सचिव मानेंग पटेल ने बताया कि समापन समारोह का शुभारंभ देवचित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों के स्वागत एवं परिचय के बाद वर्ग संयोजक ललित कुमार दवे ने सप्त दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रांत समिति अध्यक्ष ललित प्रकाश शारदा ने आभार व्यक्त किया। समारोह का संचालन वर्ग के बौद्धिक प्रमुख दिनेश भट्ट ने किया।
समापन समारोह से पूर्व प्रशिक्षण केंद्र परिसर में पूज्य कंगाल गिरि जी महाराज के समाधि स्थल के निकट स्थित प्राचीन धूनी पर अग्निहोत्र का आयोजन किया गया। इसमें प्रशिक्षण वर्ग में सहभागी सभी प्रशिक्षु प्रधानाचार्यों ने आहुतियां अर्पित कीं। इस दौरान उन्होंने शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के पुनीत कार्य में पूर्ण निष्ठा, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर वर्ग पलक प्रांत निरीक्षक नवीन कुमार झा सहित प्रांत के पदाधिकारी, प्रशिक्षण वर्ग के अधिकारी एवं प्रशिक्षु प्रधानाचार्य उपस्थित रहे। अग्निहोत्र और संकल्प के साथ सप्त दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का समापन हुआ। प्रशिक्षण के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा में भारतीय मूल्यों की भूमिका और राष्ट्र निर्माण में प्रधानाचार्यों के दायित्व को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
