चित्तौड़गढ़। भक्ति, शक्ति और त्याग की पावन धरा चित्तौड़गढ़ के रतन बाग में इन दिनों आस्था का ऐसा ज्वार उमड़ा है कि संपूर्ण वातावरण गोकुलधाम के सदृश प्रतीत हो रहा है। सनातन गौरव समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ सोपान पर जब भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य हुआ, तो जन-सैलाब हर्षाेल्लास और भक्ति के सागर में डूब गया। महामंडलेश्वर ब्रह्मचारी उत्तम स्वामी महाराज के श्रीमुख से निश्रित अमृतवाणी ने न केवल श्रोताओं के कान तृप्त किए, बल्कि उनके अंतर्मन को भी झकझोर कर रख दिया।

कथा के चतुर्थ दिवस की शुरुआत महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी महाराज द्वारा हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से हुई, जिससे पांडाल हनुमान जी की शक्ति और भक्ति से गुंजायमान हो उठा। इसके पश्चात महाराज श्री ने गृहस्थ धर्म की गूढ़ व्याख्या करते हुए चित्त की चंचलता, चिंता और उसके निवारण के मार्ग प्रशस्त किए। उन्होंने राजा भर्तृहरि के वैराग्य और अजामिल के उद्धार की कथाओं के माध्यम से यह संदेश दिया कि ईश्वर का नाम ही इस कलियुग में भवसागर से पार उतरने का एकमात्र संबल है। महाराज ने पर्यावरण संरक्षण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए धरती माता की पीड़ा का मार्मिक चित्रण किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए खनिज संपदा और जंगलों का विनाश कर पृथ्वी का श्रृंगार बिगाड़ दिया है। उन्होंने आह्वान किया कि प्रायश्चित स्वरूप प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार के हर सदस्य के नाम पर एक पौधा रोपना चाहिए।

श्री कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान समूचा पांडाल जयकारों से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन में गजेंद्र सिंह, मंहत लालनाथ योगी, राजाराम, त्रिलोक, अर्जुन मूंदड़ा, बलराम सोमानी, डॉ योगेश व्यास, नवीन पटवारी, आनंद दीक्षित, संजय काबरा, सुंदरलाल पटवा, झमकलाल सुखवाल, अनिल भटनागर, अनिल मालिवाल और दिनेश चतुर्वेदी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। अतिथियों का सत्कार और व्यवस्थाओं का संचालन प्रवीण टांक, शैलेंद्र झंवर, पं राकेश शास्त्री, राधेश्याम आमेरिया, रवि मेनारिया, राजन माली, राजकुमार कुमावत, मुकेश नाहटा, केशव व्यास, राजकुमार तोलंबिया, संजय शर्मा, विनीत तिवारी, भरत मेनारिया, रामप्रसाद बघेरवाल, दीपक वर्मा, पंकज सेन, दीनदयाल भारद्वाज, विक्रम गवारिया, कुलदीप शर्मा, भरत मेनारिया (द्वितीय), जगदीश गंगवाल, मुदित मेनारिया, चंद्रशेखर सोनी एवं मनोज साहू ने किया।

महिला शक्ति की सक्रिय भागीदारी के बीच सुशीला कंवर, भगवती आचार्य, मीना झंवर, मधु नुवाल, प्रेमलता कुमावत, रेखा सोमानी, मधु सनाढ्य, शकुंतला बाहेती, सीमा शर्मा, भावना न्याति और लीला आगाल ने महाराज श्री एवं आगंतुक अतिथियों का उपरना ओढ़ाकर तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर भावभीना स्वागत किया। राजेंद्र गगरानी ने बताया कि इस कथा के माध्यम से न केवल धार्मिक चेतना जागृत हो रही है, बल्कि सामाजिक सरोकारों और पर्यावरण रक्षा का संकल्प भी सुदृढ़ हो रहा है। श्री कृष्ण के प्राकट्य का यह उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि चित्तौड़गढ़ की सांस्कृतिक एकता और सनातन गौरव का प्रतीक बन गया है।

Pratahkal Newsroom

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