पटोलिया ग्राम पंचायत के नगा खेड़ा गांव में विकास के दावे कागजी सिद्ध हो रहे हैं, जहां ग्रामीण लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। बार-बार ज्ञापन देने और गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी ने अब ग्रामीणों के धैर्य की परीक्षा लेना शुरू कर दिया है। नगा खेड़ा निवासी रतन लाल गाडरी ने ग्राम की बदहाली का चित्रण करते हुए बताया कि गांव में आज के दौर में भी पीने के पानी के लिए नल जैसी प्राथमिक सुविधा उपलब्ध नहीं है। आवागमन के मार्ग इस कदर जर्जर और कच्चे हैं कि बारिश के दिनों में वहां कीचड़ का साम्राज्य स्थापित हो जाता है, जिससे वाहनों का निकलना तो दूर, पैदल चलना भी दूभर हो जाता है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति अत्यंत चिंताजनक है; गांव में विद्यालय न होने के कारण नन्हे-मुन्ने बच्चों को प्रतिदिन लगभग 02 किलोमीटर दूर पैदल सफर तय करना पड़ता है। बच्चों के घर लौटने तक परिजनों के मन में किसी अनहोनी या हादसे का भय निरंतर बना रहता है। ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है कि गांव में शीघ्र विद्यालय भवन, घर-घर नल कनेक्शन और पक्की सड़क का निर्माण कर इस असुरक्षा और असुविधा का अंत किया जाए।

उल्लेखनीय है कि 26 अप्रैल 2024 को समस्त नगा खेड़ा वासियों की ओर से जिलाधीश, तहसीलदार, विकास अधिकारी भूपालसागर, सरपंच एवं ग्राम विकास अधिकारी पटोलिया को लिखित प्रार्थना पत्र सौंपकर समस्याओं के समाधान की गुहार लगाई गई थी। इसके जवाब में ग्राम पंचायत ने औपचारिकता निभाते हुए टैंकरों के माध्यम से घर-घर जलापूर्ति शुरू तो की, लेकिन यह राहत मात्र 04 दिन में ही दम तोड़ गई। तब से लेकर आज तक ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। विनोद बुनकर, नागजी राम, रतन लाल गाडरी, गणेश लाल, लक्ष्मण, कमलेश, तिलकराम, सुरेश और ओंकार लाल सहित समस्त ग्रामवासियों ने प्रशासन को चेतावनी भरे लहजे में शीघ्र समाधान की मांग की है, ताकि गांव को इस अभावग्रस्त जीवन से मुक्ति मिल सके।

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