महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्थानीय इकाई कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा समूह प्रथम पंक्ति प्रदर्शन रबी तिलहन के तहत गांव शम्भूनाथ जी का खेड़ा में कृषक मांगी लाल धाकड़ के खेत पर सोमवार को प्रक्षेत्र दिवस सरसों फसल का आयोजन किया गया।

प्रतिभागी और प्रदर्शन का विवरण

  • प्रक्षेत्र दिवस में 45 कृषक एवं कृषक महिलाओ ने भाग लिया।
  • वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रतन लाल सोलंकी के अनुसार शम्भूनाथ जी का खेड़ा गांव में 29 किसानो के 11.6 हैक्टर क्षैत्र में सरसों की उन्नत किस्म आर.एच. 761 के प्रथम पंक्ति प्रदर्शन लगायें गये।
  • इस प्रदर्शन में बीज उपचार ट्राइकोड्रमा व राइजोबियम व पी.एस.बी. कल्चर से किया गया।

किस्म आर.एच. 761 की विशेषताएं और लाभ

"प्रदर्शन खेत के पौधो की वृद्धि व शाखाए अधिक तथा फलियों व दानो की संख्या स्थानीय किस्म से अधिक पाई गई, यह किस्म 136-145 दिन में पकती है एवं रेतीली एवं मध्यम भूमि क्षैत्रो के लिए उपयुक्त है, औसत पैदावार 25-26 क्विंटल प्रति हैक्टर, कम एवं मध्यम वर्षा वाले क्षैत्रो के लिए एकाधिक प्रतिरोधी किस्म है। इस किस्म में तेल की मात्रा 40 प्रतिशत होती है।"

तकनीकी जानकारी एवं प्रबंधन

डॉ. रतन लाल सोलंकी ने फसलो में खरपतवार प्रबंधन तथा कीट नियंत्रण करने के उपाय की जानकारी दी। संजय कुमार धाकड़ ने सरसों की खेती में पौध संरक्षण के बारे में तकनीकी जानकारी पर चर्चा करते हुए उत्पादित बीज को आगामी फसल की बुवाई के लिए भण्डारण कर स्वयं एवं पड़ोसी गांवो के अन्य किसानो को बीज के रूप में बेचकर आमदनी में वृद्धि करने के लिए प्रेरित किया।

जैविक खेती और आगामी सुझाव

संजय कुमार धाकड़ ने फल व सब्जियों में कीट रोग प्रबंधन के जैविक तरीके बताये।

Pratahkal Newsroom

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