पहला सुख निरोगी काया: संत दिग्विजय राम जी बोले, साधना और आध्यात्म ही तनाव, भय व रोगों से मुक्ति का मार्ग
चित्तौड़गढ़ के गांधीनगर में आयोजित आध्यात्मिक एवं स्वास्थ्य जागरण कार्यक्रम में संत दिग्विजय राम जी महाराज ने साधना, प्राकृतिक भोजन और सेवा को स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र बताया।

तस्वीर में ऊपर बाईं ओर संत श्री दिग्विजय राम जी महाराज श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे हैं, दाईं ओर प्राकृतिक अपक्वाहार की थाली है, और नीचे चित्तौड़गढ़ के कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु बैठे नजर आ रहे हैं।
आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ में बढ़ते मानसिक तनाव, अवसाद, अनिद्रा, भय, पारिवारिक विघटन और जीवनशैली संबंधी बीमारियों के बीच मानस योग साधना परिवार (तप-सेवा-सुमिरन) द्वारा आयोजित आध्यात्मिक एवं स्वास्थ्य जागरण कार्यक्रम में संत श्री दिग्विजय राम जी महाराज ने आध्यात्म, साधना और प्राकृतिक जीवनशैली को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि तनाव, भय और रोगों से वास्तविक मुक्ति का मार्ग आध्यात्म और साधना ही है।
गांधीनगर, चित्तौड़गढ़ स्थित मांगीलाल राठी एवं श्रीमती शांता देवी राठी के निवास पर आयोजित कार्यक्रम में लगभग 175 साधक-साधिकाओं एवं श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संत श्री दिग्विजय राम जी महाराज ने कहा कि "पहला सुख निरोगी काया" केवल शरीर के स्वस्थ होने तक सीमित नहीं है। जब मन शांत, विचार सकारात्मक और आत्मा साधना से जुड़ी होती है, तभी वास्तविक स्वास्थ्य और सुख की अनुभूति होती है।
उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य बाहरी उपलब्धियों के पीछे दौड़ रहा है, लेकिन अपने भीतर के आनंद, शांति और संतुलन से दूर होता जा रहा है। उनके अनुसार आध्यात्म कोई आडंबर नहीं, बल्कि स्वयं को जानने, मन को स्थिर करने और जीवन को सही दिशा देने की वैज्ञानिक प्रक्रिया है। नियमित साधना, ध्यान और सत्संग से मन की अशांति समाप्त होती है, भय दूर होता है तथा जीवन में आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
संत श्री ने प्राकृतिक भोजन को स्वास्थ्य का आधार बताते हुए कहा कि प्रकृति के निकट रहना, सात्विक आहार अपनाना, सेवा करना और साधना के लिए समय देना ही स्वस्थ, सुखी और संतुलित जीवन का मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन कुछ समय अपने शरीर के लिए योग, मन के लिए ध्यान और आत्मा के लिए साधना को समर्पित करे तो समाज की अनेक समस्याएं स्वतः कम हो सकती हैं।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्राकृतिक अपक्वाहार रहा, जिसमें पौष्टिक सलाद, ताजे फल, प्राकृतिक सूप, फ्रूट क्रीम एवं अन्य स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन परोसे गए। इस अवसर पर प्राकृतिक भोजन के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम का सफल संयोजन पुष्कर मालू एवं नीतू मालू ने किया। आयोजन की सफलता में मातृशक्ति का योगदान प्रेरणादायी रहा। अपक्व आहार की तैयारी एवं सेवा व्यवस्था में मंजू लढ़ा, शीला नामधर, अरुणा सुखवाल, सुनीता खंडेलवाल, अनीता कोगटा, पुष्पा जागेटिया, टीना पालीवाल, दिव्या शर्मा एवं सरजू मूंदड़ा ने समर्पित भाव से सेवा प्रदान की।
युवा शक्ति से अनुज अरोड़ा, शशांक पोरवाल, राकेश मालू, नरेंद्र डाड, राकेश पोरवाल, कालूराम कुमावत एवं सोनाक्षी काबरा ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवसर पर भारत माहेश्वरी, विट्ठल पांडे, संपत राम लड्ढा, जगदीश लढ़ा, नरेंद्र बाहेड़िया, कृष्ण गोपाल शर्मा, अरविंद झंवर, भगवान तड़बा एवं प्रवीण सोनी सहित अनेक वरिष्ठजन उपस्थित रहे।
मानस योग साधना परिवार (तप-सेवा-सुमिरन) का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि आध्यात्म, साधना, सेवा और प्राकृतिक जीवनशैली के माध्यम से स्वस्थ, संस्कारित, भयमुक्त और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है। परिवार का मानना है कि जब व्यक्ति अपने भीतर शांति और संतुलन विकसित करता है, तभी वह परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनता है। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्राकृतिक भोजन, मन को शांत रखने के लिए साधना और समाज को जोड़ने के लिए सेवा ही मानस योग साधना परिवार का जीवन संदेश है।

Pratahkal Bureau
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