भूपालसागर में मकर संक्रांति की धूम: आस्था के सैलाब के बीच आसमान में सतरंगी संग्राम और परंपराओं का पुनर्जन्म
चित्तौड़गढ़ के भूपालसागर में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मंदिरों में विशेष श्रृंगार, पवित्र स्नान और गुप्त दान के साथ श्रद्धालुओं ने पुण्य कमाया। पतंगबाजी के साथ-साथ सितोलिया और गिल्ली-डंडा जैसे पारंपरिक खेलों ने पुरानी यादें ताजा कर दीं। संवाददाता अरविंद गर्ग की विस्तृत रिपोर्ट में जानें भूपालसागर के उत्सव की पूरी झलक।

चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर उपखण्ड क्षेत्र में बुधवार को मकर संक्रांति का पर्व महज एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, दान-पुण्य और पारंपरिक उल्लास का एक अद्भुत संगम बन गया। अलसुबह जब सूर्य देव ने उत्तरायण में प्रवेश किया, तो पूरा क्षेत्र 'जय घोष' और भक्ति के स्वरों से गुंजायमान हो उठा। कस्बे से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक, हर ओर श्रद्धा की एक अविरल धारा बहती दिखाई दी, जिसने आधुनिकता के दौर में भी सनातन परंपराओं की जड़ों को और मजबूती प्रदान की।
उत्सव का आगाज़ पवित्र जलाशयों में स्नान और भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के साथ हुआ। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, मंदिरों में भक्तों का तांता लग गया। कस्बे के आराध्य चारभुजा नाथ मंदिर, भगवान पार्श्वनाथ मंदिर, बांके बिहारी जी मंदिर और नरसिंह द्वारा अखाड़ा मंदिर में भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसकी छटा देखते ही बन रही थी। चामुंडा माता मंदिर, आमलिया बावजी, नर्बदेश्वर महादेव और पंचायत समिति परिसर स्थित अवदेश्वर महादेव सहित सिद्धि विनायक मंदिर में भी विशेष सजावट की गई, जहाँ श्रद्धालुओं ने मत्था टेककर क्षेत्र की खुशहाली की मन्नतें मांगीं।
दान की महिमा को चरितार्थ करते हुए दानदाताओं ने गायों को हरा चारा खिलाया और तिल-गुड़, खिचड़ी, वस्त्र एवं बर्तनों का गुप्त दान कर पुण्य अर्जित किया। इस पावन अवसर पर ग्रामीण परिवेश की महिलाओं ने पारंपरिक गीतों के बीच 'तेरुंडा' उत्सव की रस्म निभाई, जिसमें सुहागिनों को सुहाग की सामग्री और आवश्यक वस्तुएं भेंट कर आपसी सौहार्द का परिचय दिया गया।
आसमान की बात करें तो वहां एक अलग ही मुकाबला चल रहा था। नीले अंबर पर रंग-बिरंगी पतंगों की चादर बिछ गई और छतों से 'वो काटा' के गगनभेदी शोर ने उत्सव के रोमांच को चरम पर पहुँचा दिया। इस वर्ष मकर संक्रांति पर एक सुखद तस्वीर यह भी देखने को मिली कि नई पीढ़ी ने मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलकर गिल्ली-डंडा और सितोलिया जैसे पारंपरिक खेलों में अपनी रुचि दिखाई। बड़े-बुजुर्गों के साथ मैदान में उतरकर इन खेलों का आनंद लेते बच्चों ने गाँव की पुरानी संस्कृति को जीवंत कर दिया।
बाजारों में भी सुबह से ही तिल-पट्टी और गज्जक की खुशबू महकती रही, जहाँ खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ी। प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी मुस्तैदी दिखाई, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ। भूपालसागर में मनाया गया यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि इसने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का एक सशक्त संदेश भी दिया।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
