बड़ी सादड़ी। चित्तौड़गढ़ के राम द्वारा में आयोजित महाशिवपुराण कथा में संत दिग्विजय राम महाराज ने परनिंदा और शिव निंदा से जुड़े प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति शिव निंदा करता है, उसकी संपत्ति नष्ट हो जाती है और परनिंदा व्यक्ति के विनाश का कारण बनती है। यह प्रसंग शिव पुराण में बताया गया है।

संत दिग्विजय राम महाराज ने कथा प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब पार्वती जी 3000 वर्ष की तपस्या कर वापस हिमाचल राज के घर आती हैं तो चारों तरफ उनकी जय-जयकार होती है। हिमाचल राज के घर बहुत बड़ा उत्सव मनाया जाता है। देवता भी आकाश से पुष्प वर्षा करते हैं।



जब यह समाचार शिव को मिलता है तो शिव अपने आप को रोक नहीं पाते और नट का रूप धारण कर उस उत्सव में स्वयं नाचते हैं। नृत्य के बाद वे पार्वती के माता-पिता से उनका हाथ मांगते हैं, लेकिन माता-पिता मना कर देते हैं।

जब यह बात सभी देवताओं को मालूम होती है तो देवता चिंतित हो जाते हैं। सभी देवता बृहस्पति जी को याद करते हैं और उनसे कहते हैं कि आप हिमाचल राज के घर जाएं और शिव निंदा करें, ताकि पर्वतराज पार्वती का विवाह किसी और के साथ करने की ओर अग्रसर हों और पार्वती जी इसके लिए मना कर दें।

हालांकि बृहस्पति जी शिव निंदा करने के लिए तैयार नहीं होते और इस कार्य के लिए मना कर देते हैं। इसके बाद देवता कैलाश पहुंचकर शिव से प्रार्थना करते हैं कि आप पार्वती जी से विवाह के लिए किसी भी प्रकार हिमाचल राज को तैयार करें।

इसके बाद शिव ब्राह्मण का वेश बनाकर जाते हैं और स्वयं शिव की निंदा करते हैं। इसके बावजूद पार्वती जी किसी और से विवाह करने के लिए तैयार नहीं होती हैं। जब पार्वती और ब्राह्मण के बीच बातचीत हो रही होती है, तब पार्वती की माता मीना देवी यह सब बातें सुन लेती हैं।

मीना देवी हिमाचल राज से कहती हैं कि वह किसी भी अवस्था में अपनी बेटी पार्वती का विवाह शिव से नहीं करेंगी। वह कहती हैं कि यदि हिमाचल राज जिद करेंगे तो वह मर जाएंगी या अपनी बेटी के साथ समुद्र में कूदकर आत्महत्या कर लेंगी। मीना देवी की बात सुनकर पर्वतराज भी चिंतित हो जाते हैं।

महादेव को जब यह सब बातें मालूम पड़ती हैं तो वे सप्त ऋषियों को याद करते हैं और उनसे कहते हैं कि आप सभी पर्वतराज के यहां जाकर उन्हें तैयार करें कि वह पार्वती जी का विवाह मेरे साथ करें।

सभी ऋषिगण जब पर्वतराज के आंगन में जाते हैं तो पर्वतराज बहुत प्रसन्न होते हैं। वे कहते हैं कि संत का मिलना भाग्य की बात है और यदि संत हमारे घर आ जाएं तो यह हमारा सौभाग्य है। संत की बात मानना हमारा सौभाग्य है और यदि हम संत की बात नहीं मानें तो यह हमारा दुर्भाग्य है।

जब सप्त ऋषियों के आने का कारण मालूम होता है तो पर्वतराज हिमाचल अपनी बेटी का विवाह महादेव से करने के लिए तैयार नहीं होते और मना कर देते हैं। महाशिवपुराण कथा में सुनाए गए इस प्रसंग में संत दिग्विजय राम महाराज ने परनिंदा को व्यक्ति के विनाश का कारण बताते हुए शिव निंदा से जुड़े घटनाक्रम का वर्णन किया।

Pradeep Vaishnav, Chittorgarh

Pradeep Vaishnav, Chittorgarh

नाम: प्रदीप वैष्णव

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: बड़ी सादड़ी तहसील

अनुभव: 26 साल (सन 2000 से 'प्रातःकाल' के साथ कार्यरत)

परिचय 

प्रदीप वैष्णव बड़ी सादड़ी तहसील क्षेत्र के एक अनुभवी पत्रकार हैं। वह स्थानीय समाचारों, सामाजिक गतिविधियों, शिक्षा और क्राइम रिपोर्टिंग के क्षेत्रों में मुख्य रूप से सक्रिय हैं। वह सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रखते हैं। तथ्यात्मक और सरल रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देना तथा जनहित से संबंधित विषयों को निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है।

बीट और विशेषज्ञता 

  • स्थानीय समाचार: बड़ी सादड़ी तहसील और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े स्थानीय व सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग।
  • क्राइम: क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और अपराध से जुड़े मामलों की कवरेज।
  • शिक्षा: शैक्षणिक गतिविधियां, विद्यार्थियों से जुड़े विषय और शिक्षा संबंधी समाचार।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

B.A. जर्नलिज्म (पत्रकारिता में स्नातक)

Next Story