चित्तौड़गढ़ में गूंजा महाराणा प्रताप का शौर्य: 429वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, विधायक आक्या ने फहराया केसरिया ध्वज
चित्तौड़गढ़ में महाराणा प्रताप की 429वीं पुण्यतिथि पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने केसरिया ध्वज फहराया और जिला कलक्टर आलोक रंजन सहित कई गणमान्य लोगों ने अश्वारूढ़ प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। सामाजिक समरसता और शौर्य को याद करते हुए सर्व समाज ने वीर शिरोमणि को नमन किया। पूरी खबर विस्तार से पढ़ें।

चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की पावन धरा पर आज एक बार फिर स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। 'हिंदुवा सूरज' और अदम्य साहस के प्रतीक प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप की 429वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पूरा चित्तौड़गढ़ शहर प्रतापमय हो गया। स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले महानायक को याद करते हुए प्रताप पार्क स्थित उनकी अश्वारूढ़ प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस गौरवमयी समारोह की शुरुआत विधायक चंद्रभान सिंह आक्या द्वारा प्रतिमा पर केसरिया ध्वज फहराने के साथ हुई, जिसके बाद आसमान 'जय एकलिंग' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक राजा नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और आत्मसम्मान के वैश्विक प्रतीक हैं। उन्होंने मेवाड़ की अस्मिता को अक्षुण्ण रखने के लिए जीवनभर संघर्ष किया और कभी भी सत्ता के आगे घुटने नहीं टेके। आक्या ने विशेष रूप से प्रताप की '36 कौम' को साथ लेकर चलने की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने सामाजिक समरसता का जो उदाहरण सदियों पहले पेश किया था, वह आज भी प्रासंगिक है। इस अवसर पर उत्तम स्वामी महाराज ने भी प्रताप की भव्य प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में जिला कलक्टर आलोक रंजन ने भी शिरकत की और पुष्पचक्र अर्पित कर वीर शिरोमणि को नमन किया। उनके साथ गजेंद्र सिंह, सुरेश शर्मा, चंद्रशेखर, अनिरुद्ध सिंह भाटी और त्रिलोक ने भी पुष्पांजलि अर्पित कर प्रताप के बलिदान को याद किया। प्रताप पार्क में श्रद्धासुमन अर्पित करने के पश्चात सभी गणमान्य नागरिकों ने शहीद स्मारक का रुख किया, जहां देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूतों को सामूहिक रूप से पुष्पांजलि दी गई।
इस भव्य आयोजन में क्षेत्र के प्रमुख व्यक्तित्वों और विभिन्न संगठनों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया। समारोह में राजेंद्र सिंह, महेन्द्र सिंह तंवर, वीरेन्द्र सिंह, चावण्ड सिंह चुंडावत, भंवर सिंह, दलपत सिंह, शिवपाल सिंह, देवेन्द्र सिंह, भवानी सिंह, गजराज सिंह, तेजपाल सिंह शक्तावत, गजराज सिंह (पुनः), गोवर्धन सिंह भाटी, भंवर सिंह (पुनः), सहदेव सिंह, लक्ष्मण सिंह, आदित्यवीर सिंह, जयपाल सिंह, नरपतसिंह भाटी, राजेन्द्र सिंह (पुनः), उदय सिंह, विजयराज सिंह, गंगा सिंह, जोगेंद्र सिंह, दिलीप सिंह, कैलाश चंद्र गुर्जर, मनोज कुमार सोनी, हर्षवर्धन सिंह, शैलेंद्र झंवर, सुदर्शन रामपुरिया, रवि मेनारिया, विश्वनाथ टांक, प्रवीण टांक, गोपाल वेद, मुकेश नाहटा, राजकुमार कुमावत, मोनू सोनी, विपुल राणावत, और राधेश्याम आमेरिया सहित सर्व समाज के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि सभा थी, बल्कि महाराणा प्रताप के उन सिद्धांतों की पुनरावृत्ति थी जिन्होंने मेवाड़ की माटी को पूरी दुनिया में वंदनीय बनाया है।

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