चित्तौड़गढ़ में मानवता का महाकुंभ: भारत विकास परिषद के 12वें शिविर में 425 दिव्यांगों को मिला नया जीवन
चित्तौड़गढ़ में भारत विकास परिषद के 12वें निःशुल्क दिव्यांग सहायता शिविर का भव्य समापन हुआ। जिला कलेक्टर आलोक रंजन की उपस्थिति में 425 दिव्यांगों को जयपुर फुट, कृत्रिम हाथ और ट्राई साइकिल जैसे उपकरणों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया गया। जानें कैसे इस मानवीय पहल ने मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के जीवन में उम्मीद का नया सूरज उगाया और मानवता की अनूठी मिसाल पेश की।

चित्तौड़गढ़। सेवा, समर्पण और आत्मीयता का संगम जब धरातल पर उतरता है, तो वह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हज़ारों बुझते हुए चिरागों के लिए उम्मीद की लौ बन जाता है। चित्तौड़गढ़ के रेलवे स्टेशन स्थित जैन धर्मशाला में पिछले तीन दिनों से जारी भारत विकास परिषद का 12वां निःशुल्क दिव्यांग उपकरण वितरण सहायता शिविर मंगलवार को एक भावुक और भव्य समापन के साथ संपन्न हुआ। इस समापन समारोह ने उस समय उपस्थित जनसमूह को झकझोर दिया, जब बरसों से दूसरों के सहारे पर निर्भर दिव्यांग अपने कृत्रिम अंगों के दम पर आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाते नजर आए।
समारोह का औपचारिक आगाज़ मुख्य अतिथि जिला कलेक्टर आलोक रंजन, क्षेत्रीय महासचिव संदीप बालदी, कमल जैन, और अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने इस पहल को 'मानवता की सर्वोच्च सेवा' की संज्ञा दी। उन्होंने भावविभोर होकर कहा कि आज का यह दृश्य अद्भुत है, जहाँ तकनीक और करुणा मिलकर दिव्यांगता को शक्ति में बदल रहे हैं। कलेक्टर ने परिषद के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि धन का वास्तविक सदुपयोग दूसरों के दुखों को हरने में ही है, और परिषद ने 12 वर्षों से लगातार इस पुनीत कार्य को जारी रखकर समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है।
भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के तकनीकी सहयोग से आयोजित इस शिविर में सेवा की पराकाष्ठा देखने को मिली। शिविर की सार्थकता उस समय सिद्ध हो गई जब रामस्वरूपलाल नामक लाभार्थी ने कृत्रिम हाथ लगने के पश्चात न केवल जिला कलेक्टर से हाथ मिलाया, बल्कि मोटरसाइकिल चलाकर अपनी आत्मनिर्भरता का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं, मानवीय संवेदनाओं को छू लेने वाले एक दृश्य में डेढ़ माह और एक वर्ष की दो मासूम बच्चियों के टेढ़े पैरों के लिए विशेष कैलिपर्स तैयार कर उन्हें पहनाए गए, जिससे उनके भविष्य की राह सुगम हो सके।
वरिष्ठ सदस्य डॉ. आई. एम. सेठिया और महेश नुवाल ने शिविर की विस्तृत रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि जयपुर फुट की विशेषज्ञ टीम के कारण इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में लोगों को लाभ पहुँचा है। शिविर के दौरान कुल 620 पंजीकरण हुए, जिनमें से 425 दिव्यांगों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया गया। वितरण के आंकड़े परिषद की सक्रियता की गवाही देते हैं, जिसके अंतर्गत 88 कृत्रिम पैर व कैलिपर्स, 15 कृत्रिम हाथ, 63 ट्राई साइकिल, 23 व्हीलचेयर, 28 बैसाखियां, 14 वॉकर, 21 स्टिक, 69 श्रवण यंत्र और 104 यूडीआईडी कार्ड प्रदान किए गए।
समारोह के अंत में परिषद के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा तकनीकी टीम और अतिथियों का उपरना, पगड़ी और प्रतीक चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। जब लाभार्थी अपने नए उपकरणों के सहारे बिना किसी बाहरी मदद के सभा स्थल से विदा हो रहे थे, तो उनके चेहरों की मुस्कान और आंखों की चमक इस बात की गवाह थी कि भारत विकास परिषद ने केवल उपकरण नहीं बांटे, बल्कि समाज के एक बड़े वंचित वर्ग को आत्मसम्मान के साथ जीने का नया हौसला दिया है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
