आस्था का महाकुंभ: श्री करेड़ा पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव का भव्य आगाज कल से भूपालसागर में
भूपालसागर में श्री 108 करेड़ा पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव 14 दिसंबर से तीन दिवसीय भव्य आयोजन के साथ शुरू होगा। लाखों श्रद्धालु भव्य वरघोड़ा, अष्टम तप आराधना और स्वामीवात्सल्य में भाग लेंगे। सुरक्षा, व्यवस्था और धार्मिक कार्यक्रमों के साथ यह महोत्सव मेवाड़ में आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा।

भूपालसागर। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित श्री 108 करेड़ा पार्श्वनाथ महातीर्थ एक बार फिर आस्था और भक्ति का महाकुंभ सजाने के लिए तैयार है। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर, संकटमोचक भगवान श्री पार्श्वनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर 14 दिसंबर, रविवार से तीन दिवसीय भव्य आयोजन शुरू होगा। यह महोत्सव 16 दिसंबर तक चलेगा और देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है।
महोत्सव का पहला दिन भगवान पार्श्वनाथजी के जन्म कल्याणक को समर्पित रहेगा। सुबह 10:30 बजे भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा, जो भक्तिमय वातावरण को और दिव्य बना देगा। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे विशाल स्वामीवात्सल्य का आयोजन होगा। तीर्थ कमेटी ने इस भव्य आयोजन की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं।
भव्य महोत्सव का एक केंद्रीय आकर्षण अष्टम तप आराधना है, जो इस तीर्थ को 2300 वर्ष से भी अधिक समय से विशेष रूप से प्रसिद्ध बनाती है। यह तपस्या आज से शुरू हो गई है और हजारों तपस्वी अपनी आराधना में लीन हैं। इसके अतिरिक्त, 15 दिसंबर को प्रक्षालन कला और पूजा विधि पर धार्मिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जबकि 16 दिसंबर को पार्श्वनाथ महोत्सव के समापन कार्यक्रम होंगे।
इस वर्ष महोत्सव विशेष महत्व रखता है, क्योंकि तीर्थ में पहली बार 108 पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा हुई है। फरवरी 2025 में 50 से अधिक प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा का भव्य समारोह संपन्न हुआ, जिससे तीर्थ अब 108 पार्श्वनाथ प्रतिमाओं से सुसज्जित हो गया है। श्रद्धालु अब यहाँ एक साथ सभी प्रतिमाओं का दर्शन, पूजन और वंदन कर सकेंगे।
श्री करेड़ा पार्श्वनाथ मंदिर, जिसे 'बावन जिनालय' के नाम से जाना जाता है, मेवाड़ के धार्मिक स्थलों में विशेष महत्व रखता है। मुख्य मंदिर 52 छोटे जिनालयों से घिरा हुआ है, जिनके दर्शन से मान्यता है कि अन्य 52 तीर्थों के दर्शन का लाभ भी प्राप्त होता है। मंदिर की प्राचीनता और वास्तुकला इसे ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अद्वितीय बनाती है।
मंदिर से जुड़ी एक अलौकिक मान्यता यह भी है कि पौष माह की दशम तिथि, भगवान पार्श्वनाथ के जन्म कल्याणक के दिन सूर्य की पहली किरण प्रतिमा को स्पर्श करती है। इसे श्रद्धालु एक दिव्य चमत्कार और प्राचीन वास्तुशिल्प की अद्भुत योजना मानते हैं।
लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, चिकित्सा और आपातकालीन सेवाओं के लिए पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। चित्तौड़गढ़ पुलिस लाइन से अतिरिक्त जाप्ता तैनात किया गया है, ताकि तीर्थ परिसर और मेला ग्राउंड पर कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।
तीन दिवसीय यह महोत्सव न केवल भक्ति और आध्यात्म का महापर्व है, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रतीक भी है। श्री करेड़ा पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव न केवल श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि पूरे मेवाड़ क्षेत्र के लिए गौरव और पहचान का उत्सव है।
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Pratahkal Bureau
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