चित्तौड़गढ़। शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति का सूत्रपात करते हुए शहीद मेजर नटवर सिंह शक्तावत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में पांच दिवसीय 'मिशन निपुण' सेमिनार और भव्य पुस्तक मेले का शानदार समापन हुआ। शिक्षा विभाग और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के साझा प्रयासों से आयोजित इस समागम ने न केवल जिले की शैक्षिक गुणवत्ता को नई दिशा दी, बल्कि शिक्षकों और विद्यार्थियों के भीतर सीखने की एक नई अलख भी जगाई। कार्यक्रम के दौरान संपूर्ण परिसर ज्ञान और नवाचार की खुशबू से सराबोर नजर आया, जहां पारंपरिक शिक्षण विधियों को पीछे छोड़ते हुए आधुनिक और प्रयोगात्मक पद्धतियों पर जोर दिया गया।

इस पांच दिवसीय बौद्धिक उत्सव में हिंदी, गणित, अंग्रेजी और संख्या ज्ञान जैसे मूलभूत विषयों पर गहन मंथन हुआ। दक्ष प्रशिक्षकों ने डेमोन्सट्रेटिव क्लस्टर कार्यशालाओं के माध्यम से शिक्षकों को यह सिखाया कि कैसे खेल-खेल में और बाल साहित्य के जरिए विद्यार्थियों की शैक्षिक दक्षता को बढ़ाया जा सकता है। इस प्रशिक्षण का मूल ध्येय 'मिशन निपुण' की दक्षताओं में नवाचार लाकर विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना रहा। जिले भर के 625 शिक्षकों और संस्था प्रधानों ने इस महाकुंभ में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अटूट विश्वास व्यक्त किया कि वे इन आधुनिक नवाचारों को अपनी कक्षाओं में जीवंत करेंगे, जिससे चित्तौड़गढ़ के विद्यार्थी शिक्षा के प्रगति पथ पर अग्रणी बन सकें।

समय-समय पर मेले का अवलोकन करने पहुंचे मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार दशोरा, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा मुख्यालय) राजेंद्र कुमार शर्मा और शंभू लाल सोमानी ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) और मिशन निपुण के लक्ष्यों को प्राप्त करने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इसी कड़ी में रमेश चंद्र पुष्करणा ने भी आयोजन की सराहना करते हुए इसे समय की मांग बताया। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 दक्ष प्रशिक्षकों, श्रेष्ठ अभ्यास करने वाले शिक्षकों और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की टीम को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया, जो उनके समर्पण और कड़ी मेहनत का प्रमाण है।

हेमराज सेन के अनुसार, मेले का मुख्य आकर्षण वहां सजी विभिन्न शैक्षिक स्टॉल थीं, जिनमें गणित पाठशाला, कहानी से नक्शा बनाओ, कहानी कॉर्नर, लेखन कुंज और किताबों की दुनिया ने सबका मन मोह लिया। विशेष रूप से समावेशी शिक्षा के तहत दृष्टिबाधित बच्चों के लिए तैयार की गई 'स्पर्शीय अधिगम सामग्री' (Tactile Learning Material) ने भूगोल और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों को समझने का एक नया नजरिया पेश किया। इस मेले की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के कैडेट्स, पीएमश्री तस्वारिया कपासन के छात्र, विभिन्न सरकारी व निजी स्कूलों और कॉलेजों के सैकड़ों विद्यार्थियों के साथ-साथ राज्य स्तरीय एनटीटी प्रशिक्षण में भाग ले रहे 150 शिक्षकों ने भी नवाचारों का अवलोकन किया।

इस वृहद आयोजन की सफलता में समग्र शिक्षा अभियान के सुरेंद्र सिंह चारण (आरपी), सुनील रातडिया, हेमेंद्र कुमार सोनी, कैलाश चंद्र धोबी, दिलीप त्रिवेदी, मीरा वर्मा, हेमलता शर्मा, गोवर्धन लाल आचार्य, आराधना सोनी, सलमा, देवराज चौधरी, गिरधारी लाल, संगीता टेलर और सोभाग सिंह हाड़ा ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। समापन समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब समर्पण और संसाधन एक साथ मिलते हैं, तो शिक्षा के क्षेत्र में मील के पत्थर स्थापित होना निश्चित है। चित्तौड़गढ़ का यह प्रयास आने वाले समय में जिले को प्रदेश के शैक्षिक मानचित्र पर एक चमकते हुए सितारे के रूप में स्थापित करेगा।

Pratahkal Bureau

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