डूंगला प्रेस रिपोर्टर प्रवीण कुमार मेहता

डूंगला प्रातकाल संवाददाता। दिवाकर नगरी डूंगला में राष्ट्र-संत महोपाध्याय श्री ललितप्रभ सागर जी महाराज ने राष्ट्र संतों के सत्संग और प्रवचन के आयोजन में श्रद्धालुओं को संबोधित किया।


सकारात्मक सोच और व्यवहार का महत्व

राष्ट्र-संत श्री ललितप्रभ सागर जी महाराज ने कहा कि—

"हम नकारात्मक सोच से बचें। हर हाल में नकारात्मक सोच से बचें। हर हाल में सकारात्मक सोच अपनाएँ। एक अकेली सकारात्मक सोच से आपके जीवन में विकास और मिठास के ढेर सारे द्वार खुलते जाएँगे।"

उन्होंने व्यवहार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि—

  • "दूसरों से ऐसा व्यवहार कीजिए, जो हम दूसरों से पाना चाहते हैं। आखिर तलवार की कीमत धार से होती है और इंसान की कीमत व्यवहार से।"
  • जो काम आप आज कर सकते हैं, उसे कभी भी कल पर न टालें।
  • जो यह कहते हैं कि मैं यह काम फिर किसी दिन कर लूँगा, तो इसका मतलब है कि यह काम उनके भरोसे तो नहीं होगा।

याद रखें, जो हालात का सही ढंग से सामना कर सकते हैं, जो व्यवहार में बड़प्पन दिखाते हैं, अप्रिय व्यवहार पर बुरा नहीं मानते, जो खुशियों पर काबू रखते हैं, कठिनाइयों को अपने पर हावी नहीं होने देते, जो तुक्के से मिली सफलता की बजाय काबिलियत और बुद्धि से मिली कामयाबी पर खुश होते हैं और जो अच्छे-बुरे में चुनाव करना जानते हैं, वे ही सही अर्थ में शिक्षित और सफल हैं।


जीने की कला और नजरिये के प्रभाव

राष्ट्र-संत सोमवार को डूंगला के मुख्य बाजार में भाणावत निवास पर आयोजित प्रवचन और सत्संग में जीने की कला पर बोल रहे थे। उन्होंने सकारात्मक और नकारात्मक नजरिये के निम्नलिखित बिंदु बताए:

सकारात्मक नज़रिये के लाभ:

  1. कार्य-क्षमता में वृद्धि
  2. मिल-जुलकर काम करने की उत्सुकता
  3. रिश्तों में बेहतरता
  4. तनाव से बचाव
  5. प्रभावी व्यक्तित्व तथा भाषा का विकास

नकारात्मक नज़रिये के नुकसान:

  1. कड़वाहट
  2. नाराज़गी
  3. लक्ष्यहीन ज़िंदगी
  4. सेहत खराब
  5. अपने तथा दूसरों के लिए तनाव

बेहतर होगा कि हम अपने हर दिन की शुरुआत किसी अच्छे विचार को पढऩे या सुनने से करें। सुबह का यही विचार दिन में हमारे व्यवहार में भी प्रगट होगा।


वाणी की मिठास और सफलता

संतप्रवर ने बोलने की कला सिखाते हुए कहा कि—

"हमारे करियर में चेहरे की खूबसूरती की भूमिका दस प्रतिशत होती है, पर वाणी की खूबसूरती की भूमिका नब्बे प्रतिशत।"

उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि—

  • "अगर काला व्यक्ति भी सही ढंग से बोलेगा तो लोगों को सुहाएगा और गोरा व्यक्ति अंट-संट बोलेगा तो लोगों को खटकेगा।"
  • ग्राहक भी उसी दुकान पर ज्यादा आते हैं जहाँ मिठास भरा व्यवहार होता है।
  • घर में भी वही बहू सास को ज्यादा सुहाती है जो मिठास भरी भाषा बोलती है।
  • किसी भी रिश्ते के टूटने के पीछे धन, दौलत, जमीन-जायदाद का कम, कड़वी जबान का हाथ ज्यादा हुआ करता है।

व्यक्ति जबान का सही उपयोग करके टूटे रिश्तों को भी सांध सकता है और बिगड़े माहौल को अपने अनुकूल बना सकता है।


ऐतिहासिक उदाहरण और शब्दों की शक्ति

महाराज श्री ने कहा कि—

"इंसान की पहचान ऊँचे पहनावे से नहीं ऊँची जुबान से होती है। हम शब्दों को संभालकर बोलें। शब्दों में बड़ी जान होती है। इन्हीं से आरती, अरदास और अजान होती है। ये समंदर के वे मोती हैं जिनसे अच्छे आदमी की पहचान होती है।"

उन्होंने धार्मिक संदर्भ देते हुए कहा कि—

  • बोलने की कला राम से सीखो। जहाँ रावण ने कड़क जबान से अपने सगे भाई विभीषण को खो दिया वहीं राम ने मीठी जबान से दुश्मन के भाई को भी अपना बना लिया।
  • अगर द्रोपदी भी दुर्योधन पर 'अंधे का बेटा अंधा' कहने का व्यग्ंय बाण न छोड़ती तो शायद न उसका चीरहरण होता न महाभारत का युद्ध छिड़ता।

भजन, मंगल पाठ और आगामी कार्यक्रम

इससे पूर्व डॉ मुनि श्री शांति प्रिय सागर जी महाराज ने सभी भाई बहनों को मंत्र उच्चारण करवाते हुए "खुद जियो सबको जीने दो" भजन गुनगुनाया। इस अवसर पर साध्वी चिंतन श्री ने भी सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में समस्त जैन समाज के साथ समस्त राजस्थानी समाज, मारवाड़ी समाज के सभी श्रद्धालु भाई-बहनों ने भाग लिया।

आगामी सूचना:

  • राष्ट्रसंतों ने डूंगला से प्रस्थान किया, वे मंगलवार को मेनार पहुंचेंगे।
  • वे वल्लभनगर और डबोक होते हुए 20 फरवरी को उदयपुर पहुंचेंगे।
  • उदयपुर के सेक्टर चार स्थित विद्या निकेतन स्कूल में शुक्रवार से रविवार सुबह 9:00 से 11:00 बजे तक 3 दिन की विराट सत्संग प्रवचन होंगे जिसमें डूंगला से अनेक भाई बहन भाग लेंगे।
Praveen Mehta, Dungla

Praveen Mehta, Dungla

नाम: प्रवीण मेहता

वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातकाल)

कार्यक्षेत्र: डूंगला उपखंड, जिला चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): प्रशासन, शिक्षा, और राजनीति

परिचय

प्रवीण मेहता राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले डूंगला उपखंड क्षेत्र के संवाददाता हैं। वह मुख्य रूप से प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा व्यवस्था, स्थानीय राजनीति, घटना-दुर्घटना और जनहित से जुड़े कार्यों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाना, ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इन योजनाओं से जोड़ना और सामाजिक सरोकार के मुद्दों को निष्पक्षता से उठाना है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

प्रवीण मेहता को प्रिंट और डिजिटल मीडिया में दो दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनके करियर का विवरण निम्नलिखित है:

  • जय राजस्थान, मेवाड़ी मीरा, और जननायक: वर्ष 2002 में इन समाचार पत्रों में कार्य किया।
  • दैनिक दशपुर एक्सप्रेस: वर्ष 2006 से लगातार 12 वर्षों तक इस समाचार पत्र में अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक भास्कर: वर्ष 2008 से 2012 तक संवाददाता और एजेंसी के रूप में कार्य किया।
  • प्रातकाल: वर्ष 2018 से वर्तमान तक लगातार 'प्रातकाल' समाचार पत्र के संवाददाता के रूप में डूंगला क्षेत्र में कार्यरत हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा 10वीं कक्षा तक पूरी की है।

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