कपासन: विधायक अर्जुन लाल जीनगर का संकल्प पूरा, रामचंद्र जाट सम्मानित
विधायक की साफा न पहनने की प्रतिज्ञा और रामचंद्र जाट के प्रयासों से बनास का पानी कपासन के तालाबों तक पहुँचा, उपखण्ड स्तर पर हुआ सम्मान।

कपासन विधानसभा क्षेत्र के तालाबों में बनास का पानी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने पर समाजसेवी रामचंद्र जाट (दाएं) को सम्मानित करते अतिथि।
भूपालसागर, 18 अप्रैल (संवाददाता अरविंद गर्ग)। कपासन विधानसभा की राजनीति में संकल्प और संघर्ष के धरातल पर जब एक-दूसरे का साथ मिलता है, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। कपासन के इतिहास में विधायक अर्जुन लाल जीनगर की साफा न पहनने की प्रतिज्ञा और सिंन्देसर निवासी रामचंद्र जाट का दिन-रात का पसीना अब एक सुनहरी इबारत बन चुका है। यह कहानी सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि उस अटूट विश्वास की है जिसने राजसमंद और चित्तौड़गढ़ की सीमाओं के अवरोधों को दरकिनार कर बनास का पानी डीके और बीएस फीडर तक पहुँचाया।
विधायक अर्जुन लाल जीनगर ने विधानसभा चुनाव के दौरान धमाना के सुप्रसिद्ध रणछोड़ राय जी मंदिर में कसम खाई थी कि जब तक बनास का पानी क्षेत्र के तालाबों—भूपालसागर, कपासन, धमाणा, डिंडोली, सिंहपुर और तुम्बडिया—तक नहीं पहुँचता, वे साफा धारण नहीं करेंगे। इस कठिन संकल्प को सिद्धि तक पहुँचाने में सिंन्देसर के रामचंद्र जाट ने एक मददगार नहीं, बल्कि एक सारथी की भूमिका निभाई। हालांकि इस कार्य में कई कार्यकर्ताओं का साथ मिला, मगर महत्वपूर्ण भूमिका रामचंद्र जाट की रही। उन्होंने योजना बनाई कि उस क्षेत्र से पानी कैसे लाना है, किसानों से कैसे समझाइश करनी है और रात-रात भर भराई डैम से निकलने वाले पानी को सिन्देसर की ओर मोड़ने के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में उतरकर धारा की दिशा को मोड़ने का साहसिक प्रयास किया।
जब डीके फीडर के मुहाने पर स्थानीय स्तर पर बनास के पानी को रोकने के लिए कड़ा विरोध हुआ, तब रामचंद्र जाट ने मोर्चा संभाला। अपनों का विरोध झेलना सबसे कठिन होता है, लेकिन रामचंद्र ने राजसमंद के जितावास, बामनिया कला और पछमता जैसे क्षेत्रों के भारी विरोध के बावजूद कपासन के अन्नदाताओं की पीड़ा को सर्वोपरि रखा। अखबारों की सुर्खियां गवाह हैं कि डीके फीडर से अवरोध हटाना सामान्य कार्य नहीं था; उन्होंने स्थानीय निवासी होने के नाते कूटनीति और कड़ी मेहनत से बाधाएं हटवाईं। यदि वे कमर नहीं कसते, तो सीमाओं के विवाद में बनास का पानी कभी कपासन की धरा को नहीं छू पाता।
रामचंद्र जाट के इसी अद्वितीय साहस और विधायक जीनगर के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के जज्बे के कारण गणतंत्र दिवस पर उपखण्ड स्तरीय समारोह में उन्हें समाज सेवी के रूप में विशेष रूप से सम्मानित किया गया। विधायक जीनगर ने स्वयं स्वीकार किया कि उनकी टीम के इन अदृश्य नायकों की बदौलत ही आज क्षेत्र के तालाब लबालब हैं। वर्तमान में कपासन के तालाबों में पानी हिलोरे ले रहा है और हर किसान की जुबां पर विधायक के प्रयासों के साथ रामचंद्र जाट का नाम है। जनहित के लिए स्वयं के क्षेत्र का विरोध सहकर दूसरों का भाग्य बदलने वाले जाट का यह कार्य राज्य स्तरीय सम्मान के लिए एक सशक्त उदाहरण है। किसानों का मानना है कि 26 जनवरी 2026 को मिला उपखण्ड स्तरीय सम्मान पर्याप्त नहीं है, वे राज्य स्तर पर सम्मान के हकदार हैं।
यह केवल पानी का आगमन नहीं, बल्कि एक जन-प्रतिनिधि के संकल्प और निस्वार्थ कार्यकर्ता के भागीरथी प्रयासों की विजय है। रामचंद्र आज भी संघर्षरत हैं। राज्य सरकार द्वारा जारी 25 करोड़ के बजट स्वीकृति से डीके और बीएस फीडर के मरम्मत कार्य तथा बनास नदी की नहर पर बन रहे पुलों का कार्य, जो वर्षों से लंबित था, जाट के प्रयासों से तीनों पुलियों पर छत डालकर पूर्ण कर लिया गया है। हालांकि, जाट ने बताया कि अब नहर की पीचिंग और सोलिंग में किसान अपनी जमीन के मुआवजे की मांग को लेकर रोड़ा बन रहे हैं। किसानों का स्पष्ट कहना है कि मुआवजा न मिलने तक वे कार्य नहीं होने देंगे।
इस बीच, कपासन विधानसभा क्षेत्र के किसानों द्वारा समाजसेवी जाट का जगह-जगह स्वागत किया जा रहा है। हाल ही में सूरजपुरा में कवि सम्मेलन के दौरान पूर्व विधायक एवं डेयरी चेयरमैन बद्री लाल जाट ने उन्हें साफा पहनाकर सम्मानित किया। जाशमा अनोपपुरा सहकारी समिति उपाध्यक्ष राजेंद्र जाट, अखिल मेवाड़ जाट समाज मातृकुण्डिया अध्यक्ष कालुराम जाट और पूर्व उपसरपंच सुरेश चन्द्र गाडरी ने भी उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज कुओं में पानी की उपलब्धता रामचंद्र जाट की मेहनत और विधायक के संकल्प का ही परिणाम है।

