कपासन। क्षेत्र के आस्था के केंद्र प्रसिद्ध श्री टांडा बावजी मंदिर परिसर में भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मंदिर के पुजारी देवीलाल गुर्जर के पावन सानिध्य में आयोजित स्नेह मिलन समारोह ने न केवल सामाजिक समरसता की मिसाल पेश की, बल्कि आगामी धार्मिक आयोजनों के लिए एक ठोस रूपरेखा भी तैयार की। इस गरिमामयी कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रबुद्ध राजनेताओं, प्रशासनिक हस्तियों और प्रबुद्ध नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन की महत्ता को और बढ़ा दिया।

समारोह की शुरुआत आध्यात्मिक वातावरण में हुई, जहाँ पुजारी देवीलाल गुर्जर के मार्गदर्शन में उपस्थित जनसमूह ने मंदिर विकास के संकल्प को दोहराया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से पूर्व किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष देशराज गुर्जर, कपासन प्रधान भेरू लाल चौधरी और पंचायत समिति सदस्य सुरेश चंद्र गाडरी ने शिरकत की। इन दिग्गजों ने मंदिर परिसर के विस्तार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में वृद्धि को लेकर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

चर्चा का मुख्य केंद्र आगामी 24 जनवरी को आयोजित होने वाला 'छठ का भव्य जागरण' रहा। मई छठ के अवसर पर आयोजित होने वाले इस विशाल जागरण की व्यवस्थाओं, सुरक्षा और जन-प्रबंधन को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। इस दौरान प्रशासक बुल सोहनलाल गुर्जर, पारी अंबालाल गुर्जर, ब्लॉक अध्यक्ष पुरषोत्तम टांक और पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष गोपाल गुर्जर ने आयोजन को सफल बनाने हेतु अपने सुझाव रखे।

स्थानीय प्रशासन और सामाजिक नेतृत्व का समन्वय भी यहाँ स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। समारोह में पूर्व उप सरपंच माधव लाल जाट, संजय चंडालिया, बोथ लाल जाट और इकाई अध्यक्ष मनोहर सिंह राव ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। वहीं कानून व्यवस्था और अनुशासन के दृष्टिकोण से हेड कांस्टेबल कन्हैया लाल गुर्जर की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। धार्मिक अनुष्ठानों की शुद्धता और विधि-विधान पर पंडित वासुदेव तिवाड़ी ने प्रकाश डाला।

इस स्नेह मिलन में मनोहर लाल मीणा, भगवती नाथ सहित आस-पास के दर्जनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने हिस्सा लेकर इस आयोजन को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में एकता का संचार करते हैं। अंत में, सभी उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 24 जनवरी का जागरण ऐतिहासिक होगा, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह समारोह केवल एक बैठक नहीं, बल्कि आस्था और विकास के संकल्प का एक सशक्त दस्तावेज बनकर उभरा है।

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