कपासन में ₹25 करोड़ की नहर परियोजना पर सवाल, पानी से पहले ढह गईं दीवारें
कपासन की बीएस-डीके फीडर नहर की नवनिर्मित दीवारें मामूली बारिश में ढहीं, ₹25 करोड़ की परियोजना में निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे।

तस्वीर में कपासन नहर क्षेत्र में एक व्यक्ति द्वारा फीते और साहुल की मदद से नवनिर्मित फीडर दीवार की जांच की जा रही है, जबकि पास ही मिट्टी में दरारें और नहर का ढांचा दिखाई दे रहा है।
कपासन विधानसभा क्षेत्र के तीन मुख्य जलाशयों—भूपालसागर, कपासन और धमाणा तालाबों में पानी पहुंचाकर कृषि और पेयजल व्यवस्था को नया जीवन देने वाली ‘बीएस’ और ‘डीके’ फीडर नहरें निर्माण कार्य को लेकर सवालों के घेरे में हैं। राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत ₹25 करोड़ के बजट के बावजूद नवनिर्मित पक्की दीवारें नहर में एक बूंद पानी का बहाव शुरू होने से पहले ही मामूली बारिश के दौरान ढह गईं।
नहर निर्माण में टेंडर और तकनीकी गाइडलाइन्स के अनुसार काम नहीं होने के आरोप सामने आए हैं। फीडर की पक्की दीवारों के पीछे नियमानुसार की जाने वाली मिट्टी की ‘प्रॉपर फिलिंग’ नहीं होने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं।
स्थानीय किसानों के अनुसार तकनीकी लापरवाही और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के चलते दीवारें 2 से 6 इंच तक अंदर की तरफ झुक गईं। कई स्थानों पर दीवारें दरकने के बाद पूरी तरह गिर गईं। किसानों का कहना है कि औसत से 30 प्रतिशत कम बारिश में ही नवनिर्मित ढांचा बिखर गया, ऐसे में पूरे मानसून के तेज जलप्रवाह को यह कैसे झेल पाएगा।
विवाद सुलझने के बाद जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता ने बीते 16 अप्रैल को ठेकेदार को नोटिस जारी किया था। नोटिस में तत्काल काम शुरू करने और मानसून से पहले पिचिंग पूरा करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद साढ़े चार महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। टूटी हुई दीवारों का सुधार नहीं किया गया और विभाग की ओर से ठेकेदार पर कोई पेनल्टी या सख्ती भी नहीं दिखाई गई।
पूरे मामले में विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से पक्ष जानने के लिए बार-बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने मोबाइल फोन रिसीव नहीं किया। अधिकारियों की ओर से जवाब नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
क्षेत्रीय ग्रामीणों और किसानों ने मामले में जयपुर से निष्पक्ष और विशेषज्ञ तकनीकी टीम भेजकर निर्माण सामग्री के सैंपल और डिजाइन की जांच कराने की मांग की है। साथ ही भ्रष्टाचार में लिप्त ठेका फर्म को तत्काल प्रभाव से ‘ब्लैकलिस्ट’ कर सरकारी धन की वसूली तथा घटिया पर्यवेक्षण करने वाले दोषी इंजीनियरों और अधिकारियों पर सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है।
इस मामले में सिंचाई विभाग, चित्तौड़गढ़ के अधिशाषी अभियंता राधेश्याम जाट ने बताया कि फीडर की दीवार टूटने का मुख्य कारण किसान द्वारा दीवार और अपने खेत के बीच की गई मिट्टी की फिलिंग है। उनके अनुसार मिट्टी के दबाव से यह हादसा हुआ। उन्होंने बताया कि संबंधित सहायक अभियंता और ठेकेदार को टूटी हुई दीवार के शीघ्र पुनर्मार्माण के सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं और जल्द ही मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
अब ₹25 करोड़ की इस नहर परियोजना में निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और टूटी दीवारों की मरम्मत को लेकर ग्रामीणों और किसानों की मांगों के बीच विभागीय कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।

Arvind Garg, Bhupalsagar
नाम: अरविंद गर्ग
वर्तमान पद: संवाददाता
कार्यक्षेत्र: उपखण्ड भूपालसागर, जिला चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम (अपराध) व राजनीति
अनुभव: 13 साल
परिचय
अरविंद गर्ग चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर उपखंड क्षेत्र के संवाददाता हैं। वह मुख्य रूप से जमीनी स्तर की खोजी और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं। अरविंद गर्ग अपने उपखंड और उसके आसपास के क्षेत्रों में क्राइम, राजनीति, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, स्थानीय विकास और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
स्नातक (Graduate)
