कांकरवा: लुणेरा विद्यालय के अस्तित्व पर मंडराया संकट, बरसाती नाले के निर्माण को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश
कांकरवा के लुणेरा गांव में राजकीय विद्यालय के पास असुरक्षित नाला निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ग्रामीणों ने बच्चों की सुरक्षा और विद्यालय की जमीन बचाने के लिए नाले को चारदीवारी के पास स्थानांतरित करने की मांग की है। जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों डरे हुए हैं ग्रामीण।

कांकरवा। शिक्षा के मंदिर और विकास की योजनाओं के बीच जब तालमेल बिगड़ता है, तो भविष्य की नींव डगमगाने लगती है। ऐसा ही एक गंभीर मामला उसरोल ग्राम पंचायत के लुणेरा गांव से सामने आया है, जहां राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के ठीक बगल में हो रहे बरसाती नाले के निर्माण ने ग्रामीणों और विद्यालय प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि नाले का निर्माण योजनाबद्ध तरीके से नहीं किया गया, तो यह न केवल विद्यालय की सुरक्षा के लिए खतरा बनेगा, बल्कि बच्चों के जीवन के साथ भी एक बड़ा खिलवाड़ साबित हो सकता है।
शुक्रवार को आक्रोशित ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल विकास अधिकारी मुकेश पोरवाल से मिला और उन्हें एक हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपकर इस समस्या के तत्काल समाधान की गुहार लगाई। ग्रामीण शिव लाल सेन और प्रभु लाल लोहार ने वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्तमान में ग्राम पंचायत द्वारा विद्यालय के कमरों के बिल्कुल सटकर नाले का निर्माण कराया जा रहा है। इस अनियोजित निर्माण से न केवल विद्यालय की दीवार को नुकसान पहुंचने की आशंका है, बल्कि विद्यालय परिसर में खेलने वाले मासूम बच्चों के साथ कभी भी कोई अनहोनी घट सकती है।
ग्रामीणों का तर्क है कि यदि इस नाले को कमरों के पास बनाने के बजाय विद्यालय की पीछे वाली चारदीवारी के सटाकर बनाया जाए, तो विद्यालय के पास पर्याप्त भूमि सुरक्षित रह सकती है। वर्तमान नक्शे के अनुसार, नाले और चारदीवारी के बीच की कीमती जमीन पूरी तरह अनुपयोगी हो जाएगी, जबकि भविष्य में विद्यालय के विस्तार या किसी अन्य सरकारी निर्माण के लिए इस भूमि की अत्यंत आवश्यकता पड़ सकती है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जो भविष्य की संभावनाओं को खत्म न करे।
इस जनहित के मुद्दे पर एकजुटता दिखाते हुए गंगाराम, किसन लोहार, शंकर लाल, अनिल, घनश्याम जाट, माधव लाल, हीरालाल, माघवलाल, प्रभु लाल लौहार, नानालाल, सम्पत, नाथू लाल, केलाश और बद्री लाल जाट सहित दर्जनों ग्रामीणों ने अपने हस्ताक्षर युक्त मांग पत्र में यह मांग की है कि प्रशासन हस्तक्षेप कर नाले का रुख दीवार की ओर करे। अब देखना यह है कि प्रशासन ग्रामीणों की इस वाजिब मांग पर कितनी गंभीरता दिखाता है या फिर सरकारी फाइलों के बीच विद्यालय के भविष्य और बच्चों की सुरक्षा को इसी तरह हाशिए पर रखा जाता है।

Pratahkal Bureau
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