कांकरवा में 4 मार्च शीतलासप्तमी से फागोत्सव की धूम रहेगी, जो रंग तेरस तक चलेगी। होली का पर्व कस्बे सहित आसपास के फलासिया, सदिपुरा, पारी, पटोलीया, राणावतौ की सादडी, खेडी और अन्य ग्रामीण अंचलों में पारम्परिक विधि विधान के साथ मनाया गया। इस मौके पर कांकरवा में सोमवार को शुभ मुहूर्त में गाँव के होलिका दहन से पूर्व पंच पटेल व विभिन्न समाजों के लोग गांव में स्थित होलीथड़ा पर एकत्रित हुए।

रावला से ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंची पूजन थाली

शाम को रावला से पूर्व प्रधान सुभाष सिंह राणावत व लेहरु लाल गुर्जर पटेल द्वारा पूजन की थाली सजाकर ढोल नगाड़ा के साथ होली चौक पहुंचे। जहां पंडित किशन लाल जी शर्मा और राजाराम शर्मा ने होली के डांडे की पूजा अर्चना कर जन समूह को तिलक लगाया।

होलिका दहन और प्रसादी की रस्म

होली दहन के दौरान ग्रामीणों ने आग में गेहूं की बालियां सेकी। इसके बाद दूसरे दिन सुबह महिलाओं ने होली को ठंडा करने के लिए होली दहन स्थल और शीतला माता पर घर से जल लाकर चढ़ाया।

नवजात शिशुओं का पारंपरिक ढूंढोत्सव

होली के दूसरे दिन ढूंढ उत्सव मनाया गया। इस दौरान गत वर्ष होली के बाद जन्मे बालक-बालिकाओं का पारंपरिक तरीके से ढूंढोत्सव मनाया गया।

Pratahkal Bureau

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